मेरठ। फर्जी स्टांप घोटाले के आरोपी स्टांप विक्रेता अक्षय गुप्ता ने जमानत पर रिहाई के लिए ऐसा फर्जीवाड़ा कराया कि रिहाई के एक सप्ताह बाद बुधवार को पुलिस ने उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया। दरअसल उसकी जमानत के लिए जमानतदारों के फर्जी दस्तावेज लगाए गए थे और जो पुलिस रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई थी वह भी जाली थी। इस मामले में सिविल लाइंस पुलिस ने उसके अलावा सात अन्य के खिलाफ भी कूटरचित दस्तावेज बनाकर धोखाधड़ी करने की प्राथमिकी दर्ज की है।
पुलिस लाइंस में एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि साल 2024 में करीब 11 करोड़ रुपये के 1577 फर्जी स्टांप लगाकर 997 बैनामे किए जाने का खुलासा हुआ था। इसकी सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने 12 जनवरी 2025 को अक्षय गुप्ता निवासी लक्ष्मीनगर सूरजकुंड को गिरफ्तार किया था। कोर्ट से उसे जेल भेज दिया गया था। बीते 25 नवंबर को अक्षय को कोर्ट से जमानत मिल गई और उसे जेल से रिहा कर दिया गया।
एसपी सिटी ने बताया कि अक्षय के जमानत के दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया तो पता चला कि जमानत पर रिहाई के लिए कोर्ट में जमानतदारों के फर्जी दस्तावेज पेश किए गए थे। साथ ही लालकुर्ती और टीपीनगर थाने के जिन दरोगाओं की ओर से रिपोर्ट लगाई गई थी, उन नामों के दरोगा थानों पर तैनात ही नहीं हैं। जांच के बाद सिविल लाइन थाने में उप निरीक्षक अंकित कुमार की ओर से अक्षय गुप्ता के अलावा दीपक, सोनू निवासी मुल्ताननगर, अजय, रोशन, पंकज, भारत निवासी कसेरूखेड़ा लालकुर्ती और नबी हसन जैदी एडवोकेट के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है।
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...फिर मिल गई जमानत
एसपी सिटी की प्रेस कांफ्रेंस के बाद सिविल लाइंस पुलिस अक्षय गुप्ता को कोर्ट में पेश किया जहां उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया।
पांच प्राथमिकी दर्ज हुई थीं, विशाल वर्मा है मास्टर माइंड
फर्जी स्टांप लगाकर बैनामा होने का खुलासा सब रजिस्ट्रार बोबिल ने किया था। सिविल लाइन थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद इस मामले में चार और प्राथमिकी दर्ज कराई गईं। पुलिस ने विवेचना में मुख्य आरोपी विशाल वर्मा निवासी सम्राट कॉलोनी, सिविल लाइन का नाम शामिल किया था। पुलिस के मुताबिक विशाल वर्मा इसका मास्टर माइंड है। जांच के बाद सिविल लाइंस थाने में विशाल वर्मा व उसके कार्यालय में तैनात कर्मचारी राहुल वर्मा निवासी रिठानी और राहुल वर्मा निवासी प्रवेश विहार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। पहले पुलिस ने विशाल के दोनों कर्मचारियों को गिरफ्तार किया। इसके बाद इस साल जनवरी में मुख्य आरोपी विशाल वर्मा को गिरफ्तार किया गया। विशाल वर्मा तभी से जेल में बंद है।