प्रदेश में भाजपा शासनकाल में सहारनपुर की जातीय हिंसा की घटना के बाद यह दूसरा बड़ा मामला है जब वरिष्ठ आईएएस ओर आईपीएस अधिकारियों की एसआईटी बनाई गई है। बुलंदशहर बवाल में एडीजी इंटेलीजेंस ही जांच के लिए पहुंचे थे। तीनों अधिकारी सोमवार को मेरठ पहुंचेंगे।
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मिलावटी तेल की सूचना पुलिस को कैसे मिली, किस अधिकारी के निर्देश पर पुलिस टीम पहुंची? थाना प्रभारी किस समय समय पहुंचे? मौके से कौन कौन कर्मचारी और क्या मिला? किस टीम ने सैंपल लिए? छापा एसपी देहात ने मारा तो शहर के कौन अफसर मौके पहुंचे या नहीं? आपूर्ति विभाग की क्या भूमिका रही? मुकदमा डीएम की अनुमति पर दर्ज हुआ या नहीं? आदि बिंदुओं पर एसआईटी जांच करेगी।
मुकदमा में वादी यदि इंस्पेक्टर हैं तो उनके भी बयान होंगे। एफएसएल भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट और आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट का भी टीम अध्ययन करेगी। फैक्टरी में मौके पर पहुंचकर जांच के बाद कार्रवाई में शामिल सभी पुलिसकर्मी, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के बयान भी लिए जाएंगे।
यह है मामला
20 अगस्त को परतापुर थाना क्षेत्र के औद्योगिक एरिया में स्थित गणपति पेट्रो और पारस केमिकल फैक्टरी पर छापा मारा गया था। जहां से करीब 2.20 लाख लीटर नकली तेल बरामद होने का दावा पुलिस ने किया था।
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पुलिस ने गणपति पेट्रो केमिकल के मालिक प्रदीप गुप्ता, आकाश गर्ग, आनंद प्रकाश, रविंद्र कुशवाहा, राजवीर, राजकुमार और पारस केमिकल के मालिक राजीव जैन, श्वेत, उमेश, तफशीराम को मौके से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। राजीव जैन पर रासुका लगी थी, लेकिन गृहमंत्रालय और एडवाइजरी बोर्ड ने रासुका को अस्वीकार कर दिया था।
इन पर हुई थी कार्रवाई
छापे के अगले दिन एसएसपी अजय साहनी ने टीपीनगर इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार गौतम को निलंबित और इंस्पेक्टर परतापुर सुभाष अत्री को लाइन हाजिर कर दिया था। आपूर्ति विभाग के एआरओ आनंद प्रभु व मनोज कुमार पर गाज गिरी थी। बाद में शासन ने डीएसओ मेरठ विकास गौतम का भी मुजफ्फरनगर ट्रांसफर कर दिया था, लेकिन जब उन्होंने ज्वाइन नहीं किया तो निलंबित कर दिया गया था।