यहां छोटे स्तर पर सिमटा धंधा
मेरठ में अब छोटे स्तर पर काम सिमट गया है। ऑयल कंपनियों से तेल भरकर निकलने वाले टैंकरों से तेल चोरी होती है। सूत्रों के अनुसार जो पेट्रोल पंप डायरेक्ट ऑयल कंपनी संचालित कर रही हैं, वहां आपूर्ति के लिए जाने वाले टैंकरों से तेल ज्यादा चोरी होता है।
...एक टैंकर से पांच सौ लीटर तक चोरी
तेल के टैंकर 10 हजार लीटर से 16 हजार लीटर तक के होते हैं। जिनमें तीन से चार चैंबर होते हैं। 12 हजार लीटर के एक टैंकर में तीन से चार चेंबर बनाए जाते हैं। प्रत्येक चेंबर में तीन से चार हजार लीटर तक तेल भरा जाता है। इसकी चाबी ऑयल कंपनी और पेट्रोल पंप संचालक के पास होती है। लेकिन साठगांठ से डुप्लीकेट चाबी टैंकर चालक बनवा लेते हैं। जिसकी सहायता से रास्ते में तेल चोरी कराकर उसमें साल्वेंट आदि मिलाकर पेट्रोल पंप पर भेज दिया जाता है। वहीं, इस चोरी के तेल में मिलावट कर अलग से टैंकर तैयार कर उसे फर्जी पेट्रोल पंपों पर बेचा जाता है। जैसा कि पिछले दिनों भोला रोड कंकरखेड़ा पर फर्जी पेट्रोल पंप संचालित मिला था। ऐसे कई पेट्रोल पंप अभी भी मेरठ सहित अन्य जनपदों के देहात क्षेत्रों में हैं।
एडीएम सिटी इस पूरे मामले को देख रहे हैं। तेल के सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद जहां पूरी कार्रवाई तय होगी। वहीं, दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं। इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।
- अनिल ढींगरा, जिलाधिकारी मेरठ
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