शिकायत के बाद खुला पूरा मामला
दिल्ली के गोविंदपुरी निवासी मोहम्मद साजिद ने बताया कि आरोपियों ने कथित रूप से फर्जी डिग्रियों और उत्तर प्रदेश चिकित्सा परिषद के जाली पंजीकरण प्रमाणपत्रों के आधार पर अस्पताल का पंजीकरण कराया था।
पीड़ित ने दो वर्ष पहले जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद मामला मुख्य चिकित्सा अधिकारी के संज्ञान में आया और स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की।
जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। संबंधित शिक्षण संस्थानों से सत्यापन कराने पर डॉक्टरों की डिग्रियां और प्रमाणपत्र पूरी तरह फर्जी निकले। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल का पंजीकरण निरस्त कर दिया।