विभागीय अफसरों से मिले तो हुआ खुलासा
अंचित ने बताया कि आठ माह का समय बीतने पर उन्हें कुछ शक हुआ। वह अपने साथियों को लेकर पहले मेरठ आयकर ऑफिस और फिर आयकर कमिश्नर लखनऊ से मिले। उन्होंने उस कमिश्नर के बारे में वहां जानकारी जुटाने की कोशिश की तो पता चला कि ऐसा कोई अफसर विभाग में है ही नहीं। यह सुनकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने फर्जी कमिश्नर से संपर्क किया तो वह शुरुआत में हंसी में बात टालता रहा। लेकिन धीरे-धीरे उसने उनसे दूरियां बनानी शुरू कर दीं। वर्तमान में वह उनकी कॉल भी रिसीव नहीं कर रहा है।
आरोपी कमिश्नर नहीं, इंस्पेक्टर है
पुलिस ने इसकी जांच की, जिसमें पता चला कि जिस युवक पर ठगी का आरोप है वह आयकर विभाग में कमिश्नर नहीं, इंस्पेक्टर है। लेकिन सवाल उठता है कि वह नीली बत्ती लगाकर कैसे चलता है। नीली बत्ती लगी होने के चलते ही उसके कमिश्नर होने पर विश्वास हो जाता था। बताया गया कि आरोपी की पुलिस विभाग में भी अच्छी घुसपैठ है, जिस कारण उसके खिलाफ पूर्व में की गई शिकायतें दबकर रह गईं।
तहरीर पर चल रही जांच
तहरीर के आधार पर जांच चल रही है। जांच में आरोपी इंस्पेक्टर है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
- अब्दुर रहमान सिद्दीकी, इंस्पेक्टर सिविल लाइन
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