श्रद्धा एवं समर्पण ही उत्तम जीवन का मार्ग
हस्तिनापुर। ऐतिहासिक नगरी की पावन धरा पर स्थित कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के छठे दिन रविवार को विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य अनिल जैन व संजय जैन तथा शांतिधारा का सौभाग्य विवेक जैन, इष्ट जैन, प्रियांशु, पवित्र, अरिहंत जैन, चंदन, संयम, नरेंद्र जैन को प्राप्त हुआ। अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले दीप प्रज्ज्वलन उमा जैन, खुशी जैन ने किया। बाल ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। भगवान आदिनाथ के पूजन के बाद सभी तीर्थंकरों को 48 अर्घ्य चढ़ाकर भक्तामर विधान का शुभारंभ किया गया। 101 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया।
भक्तामर विधान पाठ में गुरुवर भाव भूषण महाराज ने कहा कि श्रद्धा एवं समर्पण ही उत्तम जीवन का मार्ग है। श्रद्धा व समर्पण के बीच अपना जीवन निर्वाह करते रहने पर निश्चित ही एक दिन हमें परमात्मा की प्राप्ति हो जाएगी। इनसे भटके तो हमारा जीवन व्यर्थ चला जाएगा। हमें अपार दुखों का सामना करना पड़ेगा।
विधान का विसर्जन अनिल कुमार जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्जवलन सलिल जैन ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन विनय कुमार जैन ने किया। इस मौके पर अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, सह संयोजक मोतीलाल जैन, आदीश्वर प्रसाद जैन, राजीव जैन, कुणाल जैन का सहयोग रहा।