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अपनों की याद में आंखें भर आईं

Thu, 11 Apr 2019 03:33 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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हवन में आहुति देते लोग - फोटो : अमर उजाला
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 विक्टोरिया पार्क अग्निकांड का शिकार हुए लोगों की याद में बुधवार को विक्टोरिया पार्क स्थित स्मृति स्थल पर शांति यज्ञ का आयोजन किया गया। इस भीषण हादसे की बरसी पर अपनों को याद कर आंखें भर आईं। मेरठ विक्टोरिया पार्क अग्निकांड आहत कल्याण समिति की तरफ से आयोजित श्रद्धांजलि सभा में नम आंखों से संवेदना व्यक्त की गई।
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विक्टोरिया पार्क अग्निकांड की 13 वीं बरसी पर एक बार फिर वही काली और भयावह शाम याद आ गई। जब चंद ही मिनटों में आग में जलकर 65 लोगों की मौत हो गई थी। 81 लोग गंभीर रूप से झुलसे थे। 10 अप्रैल 2006 को हुई इस त्रासदी पर लोगों ने स्मारक स्थल पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तो वहां मौजूद लोग भावुक हो गए। इससे पूर्व सुबह नौ बजे स्मृति स्थल पर शांति यज्ञ आयोजित किया गया। जिसमें विक्टोरिया पार्क अग्निकांड आहत कल्याण समिति पदाधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों ने हिस्सा लिया। हादसे का शिकार हुए लोगों की आत्मा की शांति के लिए पार्क में बने स्मारक पर पुष्प अर्पित की श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद भंडारे का आयोजन किया गया।
स्मारक स्थल पर समिति के संरक्षक अधिवक्ता रोहिताश्व कुमार अग्रवाल, अध्यक्ष सतीश चंद्र, कोषाध्यक्ष राजीव गोयल, अपूर्व गुप्ता, अमित आनंद, अजय जायसवाल, राजीव सेठी, शुभांकर शर्मा, प्रतीक, आलोक, सपा जिलाध्यक्ष चौ. राजपाल सिंह, किसान नेता कुलदीप त्यागी आदि ने श्रद्धांजलि दी।  वहीं शाम छह बजे मेरठ विक्टोरिया पार्क अग्निकांड आहत कल्याण समिति की ओर से डीएम आवास से लेकर विक्टोरिया पार्क स्थित स्मारक स्थल तक कैंडल मार्च निकालकर श्रद्धांजलि दी।
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हादसे के जख्म आज भी ताजा
आज भी चेहरों पर अपनों से बिछड़ने का गम और विछोह साफ झलकता है। 13 साल बाद भी हादसे के जख्म ताजा हैं। अपनों को खोने का दुख उनके जहन में पूरी तरह ताजा है। विक्टोरिया पार्क अग्निकांड आहत कल्याण समिति के सचिव संजय गुप्ता ने बताया कि अपनों की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती है। समिति हादसे का शिकार हुए लोगों के परिजनों की लड़ाई को पूरी शिद्दत से लड़ती चली आ रही है। इस हादसे के जिम्मेदार मेला आयोजकों ने जहां नियमों का पालन नहीं किया था तो वहीं सरकारी तंत्र ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में घोर लापरवाही बरती, जिसका खामियाजा आज तक सैकड़ों लोग भुगत रहे हैं। अब पीड़ित पक्ष को उच्चतम न्यायालय से ही इंसाफ की उम्मीद है।
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