राजस्व निर्धारण की आड़ में उपभोक्ताओं का शोषण
मेरठ। स्मार्ट मीटर योजना के तहत उतारे गए पुराने विद्युत मीटर कमाई का जरिया बन गए हैं। बिना उपभोक्ता को बुलाए इन मीटरों को खोला जा रहा है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि सात से आठ माह बाद उपभोक्ताओं को मीटर शंट होने की जानकारी देकर जुर्माने का नोटिस भेजा जा रहा है। अफसर निजी कंपनी की खामी बताकर हाथ खडे़ कर रहे हैं।
के स नंबर-1
शास्त्रीनगर निवासी महिला उपभोक्ता का फरवरी, 2019 में मीटर बदला गया था। निजी कंपनी के कर्मचारियों ने उतरे गए मीटर को टेस्टिंग लैब भेज दिया। सितंबर 2019 में उपभोक्ता को नोटिस मिला, जिसमें मीटर शंट पाए जाने की पुष्टि के साथ करीब 70 हजार रुपये जमा कराने के निर्देश दिए गए। महिला डिवीजन पहुंची और वीडियोग्राफी दिखाने का आग्रह किया। कई दिन चक्कर काटने के बाद महिला को यह कहकर लौटा दिया गया कि रिकार्डिंग डिलीट हो गई है।
केस नंबर-2
पूर्वा इलाही बख्श निवासी उपभोक्ता का मीटर मार्च 2019 में बदला गया। 26 दिसंबर 2019 को नोटिस मिला, जिसमें बिजली चोरी होने के साथ चार हजार रुपये समन शुल्क और करीब 90 हजार रुपये राजस्व निर्धारण किया गया। उपभोक्ता ने विभाग में संपर्क किया और उन्हें बिना बुलाए मीटर खोलने का विरोध किया। इस दौरान उपभोक्ता को धमकाकर जेल भेजने की धमकी देते हुए वहां से टरका दिया गया।
यह कहता है नियम
उपभोक्ता के यहां से उतरने वाला मीटर लैब में हमेशा उपभोक्ता की मौजूदगी में खोला जाता है। उपभोक्ता को एसडीओ की ओर से बुलावा नोटिस भेजा जाता है। मीटर खुलने के दौरान वीडियोग्राफी होती है। उसे सुबूत के तौर पर रखा जाता है। मीटर शंट पाए जाने की स्थिति में उपभोक्ता के हस्ताक्षर कराए जाते हैं। इसके बाद राजस्व निर्धारण होता है। अधिकांश शिकायतों में उपभोक्ता को बुलाया ही नहीं गया। वीडियोग्राफी तक सुरक्षित नहीं रखी गई। डिवीजन थर्ड में सबसे ज्यादा शिकायतें मिली हैं।
नहीं सुनीं जा रही शिकायतें
मीटर शंट व बिजली चोरी के मामलों में उपभोक्ताओं की शिकायत नहीं सुनी जा रही है। अगर कोई अफसर तक पहुंच भी जाता है तो उसे हड़काकर भगा दिया जाता है। इसके विपरीत वहां घूमने वाले गुर्गे केस पकड़ते हैं और मदद के नाम पर अपनी जेब भरते हैं। आरोप है कि विभागीय अफसरों की शह पर यह काम हो रहा है।
वर्जन-
जिस कंपनी को स्मार्ट मीटर लगाने का जिम्मा सौंपा गया था, उनकी ओर से ही विभाग को मीटर देर से सौंपे जाने की जानकारी अफसरों ने दी है। अगर किसी उपभोक्ता को परेशान किया जा रहा है तो वह आकर मिले। शिकायत का निस्तारण किया जाएगा। - अरविंद मल्लप्पा बंगारी, एमडी, पीवीवीएनएल