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तनाव भरी जिंदगी पर हर रोज 'डेढ़ करोड़' का खर्च, रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, देखें आंकड़े

Fri, 07 Sep 2018 06:51 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो
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तनाव और भागदौड़ की जिंदगी के बीच मेरठ शहर के लोग रोजाना डेढ़ करोड़ से ज्यादा की सिरदर्द की दवाइयां इस्तेमाल कर रहे हैं। ये वे दवाइयां हैं जिनके लिए न तो किसी डॉक्टर की सलाह ली जाती है और न कोई जांच कराई जाती है। ये चौंकाने वाले आंकडे़ दवा विक्रेता और डाक्टरों से बातचीत के बाद सामने आये हैं। सालाना करीब साढे़ पांच अरब रुपये शहर के लोग सिरदर्द पर खर्च कर देते हैं।

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दवा बाजार से जुडे़ लोग स्वीकार करते हैं कि सिरदर्द या किसी भी पेन किलर के लिए आने वाले पेरासीटामोल, डाइक्लोफेनिक, निमोसलाइड, आईब्रुफेन साल्ट ओटीसी (ओवर दा काउंटर) की श्रेणी में है। मतलब इसके लिए किसी डाक्टर के पर्चे की आवश्यकता नहीं होती। लोग भी बिना सोचे समझे किसी से भी सुनकर दवा खरीदकर इनका लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं। मेरठ केमिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल भी स्वीकार करते हैं कि रोजाना के कारोबार में तीस से चालीस फीसदी कारोबार पेन किलर का ही है।

दवा विशेषज्ञों के अनुसार मेरठ शहर का रोजाना करीब चार करोड़ रुपये का दवा कारोबार है। सभी दवा वितरक और थोक विक्रेता के पास इन दवाओं को 30-50 फीसदी का कारोबार है। 90 फीसदी से ज्यादा लोग बिना डाक्टर की सलाह के केमिस्ट से सीधे ही दवाई ले रहे हैं। इतनी बड़ी खपत को देखते हुए अमूमन सभी दवा कंपनियां पेन किलर बना रही हैं। डा. रवि राणा स्वीकार करते हैं कि मामूली सिरदर्द होने पर लोग चिकित्सक से बात करने के बजाय सीधे केमिस्ट के पास जाकर दवाई खरीदते हैं। गंभीर हालत हो जाने पर ही डाक्टर की सलाह ली जाती है, कई बार हालत गंभीर हो जाती है।

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फाइल फोटो
खतरे वाले लक्षण
- 40 साल की उम्र के बाद सिर दर्द की शुरुआत
- बार-बार व तेज दर्द होना एवं दर्द केप्रकार में बदलाव होना
- अचनाक से दर्द की शुरुआत होना
- व्यवहार में बदलाव होना
- सिर दर्द केसाथ बुखार, गर्दन का अकड़ना, चक्कर आना, हाथों-पैरों में कमजोरी आना
- सिर की चोट के बाद दर्द होना
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लगातार दवाई लेना खतरनाक
लगातार पेनकिलर लेना खतरनाक साबित हो रहा है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता तो प्रभावित हो ही रही है। साइड इफेक्ट भी सामने आ रहे हैं। 

हर सिरदर्द नहीं खतरनाक
माइग्रेन (सिरदर्द) के वार से सावधान रहने की जरूरत है। सिरदर्द अगर ज्यादा होता हो तो हल्के में न लें। खुद दवाइयां न लें। चिकित्सक से संपर्क करें। लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए आठ सितंबर तक माइग्रेन सप्ताह मनाया जा रहा है। 30 साल से कम उम्र में सिरदर्द होना, इसके तरीके में बदलाव न होना और शारीरिक जांच में कोई कमी न आना खतरनाक नहीं माना जाता। करीब पांच प्रतिशत लोगों में खतरनाक बीमारी के कारण सिरदर्द होता है, मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि राणा बताते हैं कि करीब 200 से ज्यादा तरह के सिरदर्द होते हैं। इसमें तनाव, डिप्रेशन से सिरदर्द शामिल हैं। दूसरा प्रमुख सिरदर्द माइग्रेन है। बीमारी के कारण सिरदर्द खतरनाक होता है। जैसे ट्यूमर, खून की नस का फटना आदि। माइग्रेन का दर्द महिलाओं में ज्यादा होता है। मनोचिकित्सक डॉ. भूपेंद्र चौधरी बताते हैं कि माइग्रेन को दो में से एक व्यक्ति का मानना होता है कि उसे सामान्य सिर दर्द है। यह विश्व का तीसरा सबसे आम रोग है। करीब 90 प्रतिशत लोग चिकित्सक से बिना परामर्श लिए दवाइयां ले लेते हैं।

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