इसके मद्देनजर मेरठ में जल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक वैज्ञानिक अधिकारी अरुण कुमार मिश्रा ने सोमवार को मखदूमपुर गंगा घाट और उसके आसपास के अलग-अलग स्थानों से गंगा जल के सैंपल लिए। मिश्रा ने बताया कि पानी में प्रदूषण की जांच की रिपोर्ट अगले तीन-चार दिन में आ जाएगी। जांच से पता चलेगा कि पानी कौन सी श्रेणी का है और यह पीने लायक है या नहीं। जांच रिपोर्ट केंद्र सरकार को भी भेजी जाएगी।
प्रदूषण बढ़ाने में प्लेज की भी भूमिका
हस्तिनापुर के खादर क्षेत्र के बड़े भूभाग से गंगा होकर गुजरती है जिसके किनारे बड़े पैमाने पर प्लेज की खेती की जाती है। प्लेज को जल्दी तैयार करने के लिए मृत जीवो के अवशेष व पोल्ट्री फार्म से मुर्गों की बीट सहित कई जहरीली रासायनिक खादों का प्रयोग होता है। इससे भी गंगा प्रदूषित होती है।
लॉकडाउन में हुआ था बड़ा सुधार
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से गंगा में प्रदूषण की स्थित का पता लगाने को लॉकडाउन घोषित होने के कुछ दिन बाद गंगा के अप व डाउन स्ट्रीम में सैंपल लिए गए। सैंपल के परीक्षण से सामने आया कि अरबों रुपये खर्च करने के बावजूद गंगा की सेहत में जितना सुधार नहीं हुआ था, जितना लॉकडाउन में देखने को मिला।