मेरठ के दौराला स्थित नगली आजड़ गांव को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी है। गांव स्थित नंगली तीर्थ के इतिहास को श्रद्धालुओं के अलावा अन्य लोग भी जानें और दूसरों को भी बताएं, इसी मंशा के साथ गांव को पर्यटन विभाग पर्यटन स्थल बनाकर यहां कई विकास कार्य कराएगा।
नंगली तीर्थ का इतिहास काफी पुराना है। वर्ष 1936 में स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज के ब्रह्मलीन होने के बाद उनकी समाधि यहीं स्थापित की गई थी, जिसके बाद से ही यह गांव तीर्थ स्थल के रूप में विकसित हुआ। गांव में देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं और मन्नत मांगते हैं।
श्रद्धालुओं के अलावा गांव में अन्य लोग भी देश-विदेश से पहुंचें और नंगली तीर्थ के इतिहास के बारे में जानें इसको लेकर पर्यटन विभाग गांव को पर्यटन स्थल बनाने की तैयारी में जुट गया है। अब तक विभाग गांव में आकर दो बार सर्वे कर चुका है। पर्यटन स्थल बनाने के लिए यहां कई विकास कार्य कराए जाएंगे, ताकि दूर-दराज से आने वाले टूरिस्टों को कोई समस्या न हो।
मुख्य मार्ग पर एक गेट लगाने के साथ गांव में एक कैफेटेरिया व होम स्टे के लिए पांच घरों को डवलेपमेंट करने की योजना है। हस्तिनापुर तीर्थ नगरी के बाद जिले में यह दूसरा स्थल जो तीर्थ नगरी के रूप में देश-विदेश में अपनी पहचान बनाए हुए है। गांव के पर्यटन स्थल बनने के बाद यहां के ग्रामीणों की आय में भी बढ़ोतरी होगी, साथ ही उन्हें रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
सीडीओ व डीपीआरओ ने किया सर्वे
सीडीओ नूपुर गोयल, डीपीआरओ रेनू श्रीवास्तव ने गांव पहुंचकर सर्वे किया। इस दौरान उन्होंने नंगली तीर्थ के महामंडलेश्वर शिव प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। महामंडलेश्वर ने दोनों अधिकारियों को नंगली तीर्थ का भ्रमण कराया।
सीडीओ ने उनके समक्ष गांव को पर्यटन स्थल बनाने व यहां कई विकास कार्य कराएं जाने की बात रखी। महामंडलेश्वर ने कहा कि इस विषय को वह समिति के समक्ष रखेंगे। श्रद्धा के साथ गांव में शुद्धता बनी रहे। इस तरह से कार्य होना चाहिए। समिति का जवाब आने के बाद वह अधिकारियों को अवगत कराएंगे। इस दौरान एडीओ पंचायत रामेश्वर दयाल, केपी नंगली आदि मौजूद रहे।