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अमर उजाला एक्सक्लूसिव : मेरठ कैंट बोर्ड हुआ कंगाल, कर्मचारियों की ग्रेच्युटी के फंसे 25 करोड़, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

Thu, 03 Mar 2022 04:45 PM IST
Dimple Sirohi राजकुमार सैनी, अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ

सार

इस वर्ष कैंट बोर्ड को अभी तक कोई ग्रांट नहीं मिली है। जनवरी और फरवरी माह में कर्मचारियों के वेतन-पेंशन के 4.25 करोड़ रुपये देने में ही बोर्ड की हालत खस्ता हो गई। उधर रक्षा मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं कि कैंट बोर्ड आत्मनिर्भर बने और अपने स्तर से होनी वाली आमदनी से ही खर्च निकाले जाएं। 
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cantt board meerut - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विकास के मामले में मेरठ शहर से अलग पहचान रखने वाला कैंट बोर्ड बड़े आर्थिक संकट में फंस गया है। बोर्ड का खजाना खाली है और मार्च माह के वेतन-पेंशन में ही कर्मचारियों को 4.25 करोड़ रुपये देने हैं। बोर्ड 2017 के  बाद से अब तक सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के ग्रेच्युटी के 25 करोड़ रुपये भी नहीं दे सका है। हालात यह हैं कि कैंट की जर्जर सड़कों की मरम्मत तक नहीं हो पा रही है। 

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कैंट बोर्ड को हाउस टैक्स, तहबाजारी, पार्किंग, दुकानों के लाइसेंस आदि से प्रतिवर्ष लगभग पांच करोड़ 84 लाख की आय होती है। हर वर्ष बोर्ड को औसन 20 से 25 करोड़ रुपये सर्विस चार्ज और ग्रांट के रूप में रक्षा मंत्रालय से मिलते हैं। बोर्ड करीब 1.65 करोड़ रुपये घर-घर से कूड़ा उठाने में खर्च करता है। कर्मचारियों के वेतन में ही हर माह 4.25 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। 

उधर, इस वर्ष कैंट बोर्ड को अभी तक कोई ग्रांट नहीं मिली है। जनवरी और फरवरी माह में कर्मचारियों के वेतन-पेंशन के 4.25 करोड़ रुपये देने में ही बोर्ड की हालत खस्ता हो गई। उधर, रक्षा मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं कि कैंट बोर्ड आत्मनिर्भर बने और अपने स्तर से होनी वाली आमदनी से ही खर्च निकाले जाएं। 
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आय के साधन
भवनों की संख्या : 11 हजार,
सर्विस चार्ज :  दो करोड़ प्रतिवर्ष बीते (छह साल से नहीं मिला)
हाउस टैक्स डिमांड : छह करोड़ प्रतिवर्ष,  वसूली करीब चार करोड़
दुकानों से लाइसेंस शुल्क लगभग :         67 लाख
तहबाजारी शुल्क                लगभग :     60 लाख
वाहन पार्किंग शुल्क           लगभग :     53 लाख
कूड़ा कलेक्शन यूजर चार्ज लगभग :     चार लाख 
नोट: कैंट बोर्ड को हाउस टैक्स समेत सभी मदों से प्रतिवर्ष आय लगभग : 5 करोड़ 84 लाख रुपये

शिक्षकों के वेतन के भी लाले 
छावनी क्षेत्र में संचालित सीएबी इंटर कॉलेज समेत प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों के वेतन और अन्य खर्च के लिए 2011 से पहले उप्र सरकार प्रतिवर्ष चार करोड़ रुपये देती थी। सरकार द्वारा यह फंड बंद करने के बाद से शिक्षकों के वेतन-पेंशन का भी संकट खड़ा है। 

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सड़कों पर पैचवर्क के लिए ही चाहिए छह करोड़
छावनी क्षेत्र की 63 किलोमीटर सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए कम से कम छह करोड़ रुपये की जरूरत है। जबकि कैंट बोर्ड की स्थिति यह है कि तिजोरी पूरी खाली है। 31 मार्च तक चालू वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक हाउस टैक्स और अन्य मदों से होने वाली आय के भरोसे ही सड़कों की गड्ढा मुक्ति का प्लान बनाया जा रहा है। 
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बजट की कमी, लोग चुकाएं टैक्स 
कैंट बोर्ड आर्थिक संकट में है। कर्मचारियों को समय पर वेतन देने में भी दिक्कत आ रही है। सड़क बनवाने, नाला सफाई कराने और अन्य सुविधाएं देने के लिए कैंट बोर्ड के पास इस समय बजट की कमी है। लोगों को चाहिए कि तत्काल हाउस टैक्स ऑनलाइन चुकाएं। -जयपाल तोमर, प्रवक्ता कैंट बोर्ड

ऐसे बढ़ता गया संकट 
टोल वसूली बंद होने से 18 करोड़ का घाटा

छावनी क्षेत्र में दस स्थानों पर कामर्शियल वाहनों से टोल वसूली हो रही थी। इससे कैंट बोर्ड को सालाना 18 करोड़ रुपये की आय होती थी। रक्षा मंत्रालय के आदेश पर टोल वसूली बंद हो गई है। इससे कैंट बोर्ड को 18 करोड़ सालाना का घाटा हो रहा है। 

सर्विस चार्ज के 150  करोड़ फंसे 
कैंट बोर्ड सिविल क्षेत्र में जनता से टैक्स लेता है जबकि आर्मी एरिया में सर्विस चार्ज लेता है। कैंट बोर्ड को बीते पांच साल से यह सर्विस चार्ज नहीं मिला है। इसके करीब 150 करोड़ रुपये फंसे हैं। रेलवे पर भी सर्विस चार्ज का करीब 25 करोड़ बाकी है। 

हाउस टैक्स : नहीं वसूल  पाए 24 करोड़ 
छावनी क्षेत्र के 11 हजार आवासीय और कामर्शियल भवनों से कैंट बोर्ड को प्रतिवर्ष कम से कम छह करोड़ रुपये की आय होनी चाहिए। जबकि कैंट बोर्ड चार करोड़ की ही वसूली कर पा रहा है। कैंट बोर्ड के रिकॉर्ड के अनुसार हाउस  टैक्स और वाटर टैक्स के ही करीब 24 करोड़ रुपये बकाया हैं।
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