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Exclusive: प्रदेश सरकार की उद्योग विस्तार की मंशा को पलीता लगा रहे अधिकारी, मेरठ में सिंगल विंडो सिस्टम पर अहम विभाग नहीं अपडेट

Fri, 18 Dec 2020 11:35 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

  • हालात ऐसे ही रहे तो सफल नहीं होगी प्रदेश सरकार की औद्योगिक विस्तार की मंशा 
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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मेरठ जिले में औद्योगिक विकास कहीं कागजों और फाइलों में ही कैद होकर न रह जाए। उद्योगों को विस्तार देने के लिए प्रदेश सरकार लगातार कदम बढ़ा रही है, मगर स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही इसे धरातल पर नहीं आने दे रही है।
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जिले में सिंगल विंडो सिस्टम पर विकास प्राधिकरण और नगर निगम सहित कई अहम विभाग निवेश मित्र पोर्टल पर अपडेट नहीं हैं। उद्यमी परेशान हैं कि अगर वे इन विभागों की अनुमति लेना चाहें तो अनुमति कैसे मिलेगी। दूसरी ओर इनवेस्टर्स समिट में शामिल होने वाले निवेशक करीब दो साल बाद परेशानियों की फाइल लिए इंतजार कर रहे हैं लेकिन समस्या का समाधान हीं हो रहा है।

प्रदेश सरकार ने हाल में कहा था कि उद्यमी उद्योग की अनुमति के लिए केवल ऑनलाइन आवेदन करें। जिले में ये बात सिर्फ सपना नजर आ रही है। जब पोर्टल पर उद्योग संचालन के लिए अहम विभाग ही अपडेट नहीं हैं, तो उद्यमियों को उद्योग लगाने की अनुमति सिंगल विंडो से कैसे मिलेगी।
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मेरठ में पिछले दिनों उद्यमी और भाजपा महानगर मंत्री अरविंद गुप्ता ने जिला उद्योग केंद्र में शिकायत की थी कि जिला पूर्ति, एसडीएम, एनएचएआई, आवास-विकास, नगर निगम और एमडीए जैसे मुख्य विभाग निवेश मित्र पोर्टल पर उपलब्ध ही नहीं हैं। ऐसे में उद्यमी को इन विभागों से अनुमति लेने के लिए क्या करना होगा? जिला उद्योग केंद्र द्वारा इसका जवाब नहीं दिया गया है।

क्या करें उद्यमी, नहीं मिला जवाब
जिला उद्योग केंद्र के डीआईसी वीके कौशल ने इस सवाल को मुख्यालय कानपुर भेजकर गाइडलाइन मांगी मगर वहां से भी जवाब नहीं मिला। उद्यमी भी परेशान हैं कि जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं होता वे उद्योग कैसे स्थापित करें। उद्यमियों को नक्शा पास कराने व खाद्य आपूर्ति विभाग, आवास विकास सभी की अनुमति लेना अनिवार्य होता है।

जमीन के लिए भटक रहे निवेशक
जिले में निवेशकों ने इंवेस्टर्स समिट के दौरान खासे निवेश के लिए एमओयू साइन किए थे। मगर अधिकांश निवेशक जमीन न मिलने के कारण हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। पसवाड़ा पेपर मिल का 400 करोड़ रुपये का निवेश जमीन के एक छोटे से टुकड़े के कारण रुका है। वहीं अन्य निवेशकों को भी प्रशासन विस्तारीकरण के लिए जमीन नहीं दिला पाया है।
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