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गौरैया बचाने को हर किसी को करनी होगी पहल

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गौरैया बचाने को हर किसी को करनी होगी पहल
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मेरठ। गौरैया को बचाने के लिए हर किसी को पहल करनी होगी। उसके लिए घरौंदे तैयार कराने होंगे। ऐसा नहीं किया तो एक दिन वह विलुप्त हो जाएंगी। यह बात शुक्रवार को गौरैया दिवस पर हुई संगोष्ठी में गौरैया के संरक्षण को लेकर काम कर रहे लोगों ने कही।
गौरैया मित्र एवं टीम वंडरफुल के संयुक्त तत्वावधान में गौरैया बचाओ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन शास्त्रीनगर में किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आज कोरोना जैसी भीषण आपदा से सारा विश्व जूझ रहा है। यह आपदा चीन की 60 वर्ष बाद दूसरी भूल का परिणाम है। गौरैया मित्र मंडल के संस्थापक सदस्य प्रो. देवेश चंद्र शर्मा ने कहा कि चीन ने 1958 में प्रकृति के विरुद्ध आचरण करके खुद को नुकसान में डाल लिया। अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के नाम पर दो करोड़ गौरैया की हत्या करा दी गई। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि भयंकर अकाल और महामारी फैल गई। 50 लाख लोग मारे गए। जिस फसल की सुरक्षा के लिए गौरैया को मारा गया था, उसी फसल को उन कीड़ों ने खराब कर दिया, जिनको गौरैया खाती थी। चीन को जब अपनी भूल का अहसास हुआ तो रूस से डेढ़ करोड़ गौरैया आयात करनी पड़ीं। दूसरी भूल के कारण चीन ने आज फिर खानपान में प्रकृति के विरुद्ध आचरण करके सारे विश्व को कोरोना जैसी भयावह आपदा के सामने खड़ा कर दिया।
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गौरैया मित्र मंडल के सदस्य डॉ. नवीन गुप्ता ने कहा यदि प्रकृति से छेड़छाड़ जारी रही तो पर्यावरण की बात बेमानी होगी। उन्होंने कहा कि देखने में बहुत छोटी इस चिड़िया का महत्व समझने की आवश्यकता है।
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डॉ. विवेक त्यागी ने विश्व में घट रही गौरैया की संख्या के बारे में बताया। अनुज त्यागी ने गौरैया संरक्षण की मुहिम को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। बताया कि अब तक 500 लकड़ी के घर बांटे जा चुके हैं। संगोष्ठी में गोपाल भगत, प्रो. एके सिंह, डॉ. हरेंद्र सिंह, अशोक अग्रवाल, डॉ. गौरव दत्ता, हरि विश्नोई, डॉ. कपिल गर्ग, एडवोकेट हरीश त्यागी ने कहा ध्वनि और वायु प्रदूषण रोकने के लिए चल रहे अभियानों की तरह गौरैया संरक्षण के लिए भी सामूहिक प्रयास की जरूरत है। इस मौके पर गौरैया के लिए लकड़ी के घरौंदे भी उपहार दिए गए। आयोजन में ऐश्वर्या शर्मा, अनुकृति, लक्ष्य का सहयोग रहा।
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