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कृषि कानूनों से फिर ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना: जल पुरुष राजेंद्र सिंह

Tue, 22 Dec 2020 01:38 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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जल पुरुष राजेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला
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तीनों कृषि कानून न केवल लूट की छूट देने वाले हैं बल्कि इनसे एक बार फिर ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की जा रही है। यह बातें मैग्सेसे अवार्डी और स्टॉकहोम वाटर प्राइज से सम्मानित जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने सोमवार को हरिद्वार से यहां चौधरी चरण सिंह पार्क पहुंची किसान कानून साक्षरता यात्रा के दौरान कही।

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उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान कोई भी किसान या किसान संगठन ऐसा नहीं मिला जिसने सरकार से इन कानूनों को बनाने के लिए कहा हो। ये कानून सरकार ने नहीं बल्कि अंबानी और अड़ानी के कहने पर बनाए हैं।

कहा कि कोविड़-19 के चलते जब पूरा देश लॉक था तो जुलाई में इन कानूनों को बनाया गया। लागू होने से पहले अंबानी और अड़ानी को भंडारण के लिए जमीन दे दी गई। सिंह ने कहा कि अब देश की जनता समझ गई है कि ये कानून गुलामी के रास्ते पर ले जाने वाले हैं। ये कानून हमारी जमीन, खेत, खलिहान और उत्पादन को छीनने वाले हैं। ऐसे कानूनों के बल पर ईस्ट इंडिया कंपनी ने देश पर राज किया था।

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कहा कि काले कानून बनाकर पीएम मोदी और शाह अब किसानों को बांटने में लगे हैं। इसके बावजूद किसान अंहिसा और धैर्य के साथ आंदोलन में जुटा है। यह उसकी अब तक की सबसे बड़ी जीत है। कानूनों का समर्थन करने वाले किसानों के बारे में कहा कि सरकारी गाड़ियों और संरक्षण में यात्रा निकालने वाले किसान नहीं हैं। किसान तो दिल्ली बार्डर पर बैठे हैं।

सिंह ने कहा कि ये गांव का पानी, जवानी और किसानी बचाने का आंदोलन है। किसान अब तीनों कानून वापस लिये जाने के बाद भी तब तक आंदोलन वापस नहीं लेंगे जब तक एमएसपी को कानूनी रूप नहीं दिया जाएगा। कार्यक्रम में गंगा जल बिरादरी के संयोजक मेजर डॉ. हिमांशु, किसान अधिकार आंदोलन के अध्यक्ष कुलदीप त्यागी, हाजी अरशी, गिरीश शुक्ला, प्रभात राय आदि शामिल रहे। यहां से किसान यात्रा गाजियाबाद के लिए रवाना हो गई।

किसानों को जागरूक करना उद्देश्य
राजेंद्र सिंह ने कहा कि कृषि कानून साक्षरता यात्रा का उद्देश्य किसानों को जागरूक करना है। किसानों ने जब ये कानून मांगे ही नहीं तो सरकार क्यों थोप रही है। इससे साफ है कि ये कानून किसानों के लिए नहीं बल्कि दो उद्योगपतियोंके लिए लाए गए हैं।
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