केस स्टडी-1
लिसाड़ी गेट के रहने वाले अब्दुल को मिर्गी के दौरे पड़ते थे, लेकिन भूत प्रेत का असर समझकर परिवार वाले झाड़फूंक कराते रहे। ठीक न होने पर जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में दिखाया। मिर्गी का इलाज चल रहा है। अब पहले से ठीक है।
केस स्टडी-2
जागृति विहार की रहने वाली कमलेश को मिर्गी के दौरे पड़ते थे। वह बेहोश हो जाती थीं, आंखे फट जाती थीं। परिवार वाले जादू टोना समझकर इधर उधर दिखाते रहे। ठीक नहीं हुई तो मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में दिखाया तो मिर्गी का पता चला। इलाज चल रहा है।
सरकारी अस्पतालों में निशुल्क मिलती हैं दवाएं
जिला अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेंद्र किशोर ने बताया कि मिर्गी की दवाइयां सरकारी अस्पतालों में निशुल्क मिलती हैं। इसका इलाज निरंतर कराना पड़ता है। अगर व्यक्ति एक समय की भी दवाई छोड़ देता है तो दौरा पड़ने का खतरा रहता है। अगर व्यक्ति को तीन साल तक दौरा न पड़े और जांच सामान्य हो तो दवाइयां बंद हो जाती हैं।
गहरी नींद लें और व्यायाम करें
मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण पाल ने बताया कि पर्याप्त व्यायाम, स्वस्थ आहार का ध्यान रख पर्याप्त नींद लेनी चाहिए। इससे आराम मिलता है। चिकित्सक से परामर्श कर ही दवाइयां लेनी चाहिए। खुद से डॉक्टर न बनें।