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Meerut News: ऊपरी हवा या करतूत नहीं, बीमारी है मिर्गी...इलाज कराएं

Mon, 13 Feb 2023 01:34 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मिर्गी एक बीमारी है, लेकिन लोग इसे ऊपरी हवा या कोई करतूत समझ लेते हैं। इलाज के बजाय झाड़फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं।
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मिर्गी - फोटो : istock
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विस्तार
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मिर्गी एक बीमारी है, लेकिन लोग इसे ऊपरी हवा या कोई करतूत समझ लेते हैं। इलाज के बजाय झाड़फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं। इससे मरीज़ की हालत ठीक होने के बजाय और बिगड़ जाती है। लिहाजा लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल फरवरी के दूसरे सोमवार को अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है।

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मिर्गी मस्तिष्क का एक पुराना विकार है। इसमें ‘दौरे’ या ‘फिट’ पड़ते हैं। दौरे न्यूरॉन्स (मस्तिष्क कोशिकाओं) में अचानक, अत्यधिक विद्युत निर्वहन के कारण होते हैं। यह स्थिति किसी भी उम्र में लोगों को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि हर उम्र में चिंताएं और समस्याएं होती हैं।

दौरे के लक्षण अलग-अलग होते हैं। ये इस बात पर निर्भर करते हैं कि मस्तिष्क में पहली बार परेशानी कब शुरू होती है, और यह कितनी फैलती है। इसके अस्थायी लक्षण होते हैं, जैसे जागरूकता या चेतना का नुकसान, चलने-फिरने में परेशानी। दौरे वाले लोगों में शारीरिक समस्याएं अधिक होती हैं, जैसे फ्रैक्चर और दौरे से जुड़ी मूर्छा आदि से चोट लगना। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की ओपीडी में हर साल 10 हज़ार ज़्यादा मरीज़ आते हैं। 

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केस स्टडी-1
लिसाड़ी गेट के रहने वाले अब्दुल को मिर्गी के दौरे पड़ते थे, लेकिन भूत प्रेत का असर समझकर परिवार वाले झाड़फूंक कराते रहे। ठीक न होने पर जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में दिखाया। मिर्गी का इलाज चल रहा है। अब पहले से ठीक है।

केस स्टडी-2
जागृति विहार की रहने वाली कमलेश को मिर्गी के दौरे पड़ते थे। वह बेहोश हो जाती थीं, आंखे फट जाती थीं। परिवार वाले जादू टोना समझकर इधर उधर दिखाते रहे। ठीक नहीं हुई तो मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में दिखाया तो मिर्गी का पता चला। इलाज चल रहा है।

सरकारी अस्पतालों में निशुल्क मिलती हैं दवाएं
जिला अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेंद्र किशोर ने बताया कि मिर्गी की दवाइयां सरकारी अस्पतालों में निशुल्क मिलती हैं। इसका इलाज निरंतर कराना पड़ता है। अगर व्यक्ति एक समय की भी दवाई छोड़ देता है तो दौरा पड़ने का खतरा रहता है। अगर व्यक्ति को तीन साल तक दौरा न पड़े और जांच सामान्य हो तो दवाइयां बंद हो जाती हैं।

गहरी नींद लें और व्यायाम करें
मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण पाल ने बताया कि पर्याप्त व्यायाम, स्वस्थ आहार का ध्यान रख पर्याप्त नींद लेनी चाहिए। इससे आराम मिलता है। चिकित्सक से परामर्श कर ही दवाइयां लेनी चाहिए। खुद से डॉक्टर न बनें।
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