मेरठ। कोरोना पीड़ित के अंतिम संस्कार में सूरजकुंड शवदाह गृह में परेशानी आ रही है। वहीं, समाजसेवी डीएम से विद्युत या फिर गैस चलित शव दाह गृह की मांग कर रहे हैं।
व्यापारी नेता विपुल सिंघल का कहना है कि कोरोना संक्रमित शवों की दुर्दशा एवं उनके अंतिम संस्कार में अधिक समय लगना दुर्भाग्यपूर्ण है। मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमित शवों को अंतिम संस्कार के लिए सूरजकुंड लाने वाले चालक, शव दाह कर्मी एवं अन्य स्टाफ मौजूद व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं। इसलिए इसमें सुधार की आवश्यकता है। वहीं, ब्रह्मपुरी निवासी समाजसेवी राकेश गौर का कहना कि अंतिम संस्कार के लिए शव लाने वाले चालक को श्मशान कर्मियों को सौंपने की प्रक्रिया में करीब चार घंटे लग रहे हैं। इस समस्या का हल निकालने के लिए श्मशान घाट में निश्चित स्थान पर दो से चार कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाए। ये शव को उतारकर वाहन को मुक्त करें। उनका कहना है कि महानगर में कोरोना संक्रमण बढ़ने के मद्देनजर आने वाले समय में शवों का अंतिम संस्कार कराने के लिए लकड़ी की आवश्यकता बढ़ सकती है। जिससे पर्यावरण का नुकसान होगा और प्रदूषण भी बढ़ेगा। ऐसे में डीएम से विद्युत चालू कराने या गैस चलित शवदाह गृह की स्थापना अति शीघ्र कराए जाने की मांग की है। उधर, गंगा मोटर कमेटी के कार्यालय इंचार्ज कपिल पटेल का कहना है कि शवदाह गृह में सभी प्रकार की व्यवस्था की जा रही है। पुरोहितों को पीपीई किट भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। उनका पूरा सहयोग मिल रहा है। इसलिए शवों के अंतिम संस्कार में कोई परेशानी नहीं है।