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Meerut News: सरकारी खजाने में नहीं, परिचालकों की जेब में जाता है इलेक्ट्रिक बसों का किराया

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सिटी ट्रांसपोर्ट की इलेक्ट्रिक बस
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मेरठ। सिटी ट्रांसपोर्ट की इलेक्ट्रिक बसों के किराये में भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है। यात्रियों से जहां अधिक किराया वसूला जा रहा है, वहीं किराये की रकम सरकारी खाते में लेने की बजाय ऑनलाइन निजी खाते में ली जा रही है। यात्रियों को टिकट भी नहीं दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि प्रतिदिन 50 हजार रुपये से अधिक का भ्रष्टाचार हो रहा है। इसका अमर उजाला की पड़ताल में हुए इस खुलासे को सिटी ट्रांसपोर्ट बस सेवा के अधिकारियों ने स्वीकार किया है।
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अमर उजाला टीम ने रुड़की रोड सौफीपुर से बेगमपुल के लिए इलेक्ट्रिक बस पकड़ी। परिचालक ने किराया मांगा तो टीम के सदस्य ने कैश न होने की बात कहकर यूपीआई से पैमेंट करने का प्रस्ताव रखा। परिचालक ने यूपीआई से टिकट की पेमेंट लेने से इन्कार कर दिया। परिचालक नीरज कुमार ने 15 रुपये अपने निजी खाते में ले लिए और यात्रा करने का अवसर दिया, लेकिन टिकट नहीं दिया। इसके बाद बेगमपुल से दिल्ली रोड अमर उजाला कार्यालय तक के लिए दूसरी इलेक्ट्रिक बस में यात्रा शुरू हुई। इस बस के परिचालक गौरव कुमार ने भी यात्री टिकट कैश में ही देने की बात कही। चूंकि कैश नहीं था तो ऑनलाइन पेमेंट करने का प्रस्ताव रखा गया। इस बस के परिचालक ने भी अपने निजी खाते में 20 रुपये लिए। टिकट नहीं दिया। रिपोर्टर की सीट पर बेगमपुल से बैठे यात्री अनिल कुमार से कैश में 25 रुपये यात्री किराया लिया गया, लेकिन टिकट नहीं दिया। यह हाल सिटी ट्रांसपोर्ट की किसी एक दो बस में नहीं, बल्कि अधिकतर बसों का है।

शहर के रूटों पर हैं 42 इलेक्ट्रिक बसें
- मेरठ शहर में सिटी ट्रांसपोर्ट की 42 इलेक्ट्रिक बसें नगर निगम सीमा में दौड़ रही हैं। इन बसों को शहर के सभी सरकारी और प्राइवेट बस अड्डों, सार्वजनिक स्थानों, मेडिकल कॉलेज और मेट्रो स्टेशनों से जोड़ा गया है, ताकि इन बसों का लाभ शहर की अधिक से अधिक जनता को मिल सके और सरकार को भी अधिक राजस्व की प्राप्ति हो। लेकिन, सरकार की इस योजना की शहर में हवा निकाल दी गई है। यह चोट पहुंचाने वाले इलेक्ट्रिक बसों के परिचालक ही हैं। ।
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देहात से प्रतिदिन मिलते थे दो से ढाई लाख, अब केवल एक लाख तक सिमटी आय
- सिटी ट्रांसपोर्ट बसें जब से नगर निगम सीमा में चल रही हैं, तब से यात्री किराये से होने वाली आय 50 प्रतिशत कम हो गई है। सिटी ट्रांसपोर्ट बस सेवा के रिकॉर्ड के मुताबिक जब इलेक्ट्रिक बसें शहर और देहात तक जाती थीं,तब प्रतिदिन दो से ढाई लाख रुपये किराये से आय होती थी। अब लगभग एक माह से सभी 42 इलेक्ट्रिक बसें नगर निगम सीमा में संचालित की जा रही हैं। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि अब यात्री किराया प्रतिदिन एक लाख रुपये रह गया है।

ईटीएम मशीन में अभी तक नहीं हैं बार कोड, एटीएम का प्रयोग
- सिटी ट्रांसपोर्ट की बसों में यात्री किराया लेने और टिकट जारी करने के लिए ईटीएम मशीनें तो हैं, लेकिन उनमें बार कोड नहीं है। केवल डेविट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ही ऑनलाइन किराया लिया जा सकता है। परिचालक बार कोड के माध्यम से भी अपने निजी खाते में ही किराया ले रहे हैं।

कोट
- सिटी बसों में जीएमडी कंपनी के परिचालक हैं। हमने भी कई बार बसों में जांच की तो बगैर टिकट यात्री पकड़े गए। सभी बसों में लगे कैमरों के माध्यम से भी परिचालकों की इस करतूत को पकड़ा जा रहा है। कार्रवाई की जा रही हैं। इन बसों के यात्रियों को चाहिए कि वह किराया देते समय टिकट जरूर प्राप्त करें। परिचालकों को उनके निजी खाते में किराये का पैसा न दें। ईटीएम मशीनों में बार कोड की व्यवस्था अपडेट कराई जा रही है। अभी तक ईटीएम मशीन से केवल डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ही ऑनलाइन पेमेंट किया जा सकता है। - सचिन सक्सेना, एआरएम सिटी ट्रांसपोर्ट बस सेवा।

सिटी ट्रांसपोर्ट की इलेक्ट्रिक बस

सिटी ट्रांसपोर्ट की इलेक्ट्रिक बस

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