बेगमपुल फ्लाई ओवर के मामले पर एमडीए सभागार में अधिकारियों और व्यापारियों की बैठक में बड़ा सवाल यह सामने आया कि एक ही एलाइनमेंट पर तीन प्रोजेक्ट कैसे काम करेंगे। बेगमपुल पर मेट्रो, फ्लाईओवर और नीचे सड़क मार्ग का प्रस्ताव है। ऐसे में इसका एक संयुक्त डिजाइन बनाया जाए और उस पर फिर से बैठक हो। यदि यह प्लान सही होगा और सभी की सहमति बनेगी तभी इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जाए।
बृहस्पतिवार को एमडीए सभागार में मेरठ विकास प्राधिकरण, सेतु निगम, नगर निगम तथा शहर के व्यापारियों की बैठक हुई। बैठक में वीसी साहब सिंह और सीटीपी जेएन रेड्डी ने बेगमपुल फ्लाईओवर का लेआउट दिखाया। इस पर पूर्व विधायक अमित अग्रवाल, संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष नवीन गुप्ता, विपुल सिंघल, कमल ठाकुर आदि ने चर्चा की। इस मौके पर व्यापारियों ने कहा कि मेट्रो ट्रेन यहां से गुजरनी है। कैबिनेट में भी गत दिवस इसका प्रस्ताव पास हो चुका है। यह बड़ा प्रोेजेक्ट है तो ऐसे में इस पर पहले काम होना चाहिए। मेट्रो की मेरठ को ज्यादा जरूरत है और इंतजार भी। ऐसा न हो कि यह फ्लाईओवर मेट्रो केआड़े़ आ जाए।
एमडीए अधिकारियों ने रखा प्रस्ताव
फ्लाई ओवर की संशोधित डीपीआर पर भी विचार हुआ। एमडीए अधिकारियों ने कहा कि इसे फोर लेन से घटाकर तीन लेन किया जा सकता है। डिवाडर की तरफ एक-एक लेन फुल तथा आधा-आधा लेन होगी। इससे पुल की चौड़ाई घटकर कुल 13.80 मीटर ही रह जाएगी। यहां हैवी व्हीकल को प्रतिबंधित किया जाएगा। इसके अलावा 3.5-3.5 मीटर की सर्विस लेन बनेंगी। पुल पर सात सात मीटर की बजाय डिवाइडर के दोनों तरफ छह छह मीटर सड़क ली जाएगी।
मेट्रो के पिलर से नहीं बचेगी सर्विस रोड
बैठक में अहम सवाल उठा कि फ्लाई ओवर बनेगा और उसके नीचे साढ़े तीन मीटर की सर्विस रोड बनेगी। उधर मेट्रो पिलर पर चलेगी। उसका पिलर ही डेढ़ मीटर जगह घेरेगा। ऐसे में बाकी बची जगह पर व्यापारी अपनी कार से कैसे गुजर सकेंगे। सारा व्यापार ही चौपट हो जाएगा। यहां तो शहर का मुख्य बाजार है। वह तो ठप हो जाएगा।
संयुक्त प्रस्ताव पर ही बन सकती है बात
वीसी साहब सिंह ने कहा कि शहर के विकास के लिए पुल बेहद जरूरी है। व्यापारियों ने कहा कि विकास व्यापारी भी चाहते हैं पर बर्बाद होने की शर्त पर नहीं। शहर में चलना दुश्वार हो जाए। दुकानें तोड़ने पर प्रशासन आमादा हो जाए। व्यापारियों ने कहा कि इसके लिए ज्वाइंट प्लान बने। संयुक्त डिजाइन में तीनों प्रस्तावों को सुपर इंपोज किया जाए। तभी इस पर बात हो सकेगी।
मेट्रो अधिकारियों से करेंगे बात
इस बाबत एमडीए अधिकारी अब फ्लाई ओवर डीपीआर बनाने वाली संस्था राइट्स और एलएमआरसी से भी बात करेंगे। सीटीपी के मुताबिक ज्वांइट डिजाइन के लिए यह मंथन करना होगा। फिर से ले आउट तैयार करेंगे और फिर देखा जाएगा कि क्या हो सकता है। यह सही है कि तीनों प्रोजेक्ट पर ही काम होना है। ऐसे में कॉमन प्लान बनाना होगा। चूंकि फ्लाई ओवर का नक्शा भी मेट्रो अधिकारियों को भेजा जा चुका है। वह इस पर सहमति भी जता चुके हैं। लेकिन दोबारा से नए बिंदुओं पर बैठक होगी।
ढाई साल तक ट्रैफिक सिस्टम होगा कुंद
व्यापारियों ने कहा कि पुल लगभग ढाई साल में बनेगा। दावे भले ही कितने भी किए जा रहे हो पर इससे पहले काम होने वाला नहीं। इस दौरान यातायात व्यवस्था कैसे चलेगी। न केवल बेगमपुल से हापुड़ अड्डे की तरफ जाने वाला रोड ब्लॉक होकर रह जाएगा बल्कि पूरा असर दिल्ली रोड पर भी आएगा। रूट डायवर्जन का यहां क्या प्लान है, इस पर भी मंथन जरूरी है। कैंट क्षेत्र से डायवर्जन आसान नहीं। ऐसे में लोग कैसे शहर में चल पाएंगे।
विभागों में तालमेल नहीं
पुल को लेकर सारे विभागों में आपसी तालमेल ही नहीं है। पुल बने पर सही ड्राइंग के साथ। मेट्रो चलेगी तो जगह कहां बचेगी। पुल के ऊपर मेट्रो चलाई तो भी बात नहीं बनेगी। मेट्रो के लिए पुल को बलिदान किया जा सकता है, क्योंकि मेट्रो जरूरी है। साथ ही किसी व्यापारी की दुकान भी नहीं टूटनी चाहिए। -नवीन गुप्ता, अध्यक्ष संयुक्त व्यापार संघ
बेहतर प्लान बनाया जाए
शहर का सुनियोजित विकास जरूरी है। लेकिन पुल इस शर्त पर नहीं बनना चाहिए कि व्यापारियों का भारी नुकसान हो जाए। बेहतर प्लान बनाया जाए, जिसमें सभी प्रोजेक्ट को शामिल किया जाए। तभी इस प्रोजेक्ट पर काम हो। मेट्रो यहां का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। -उपाध्यक्ष संयुक्त व्यापार संघ कमल ठाकुर
व्यापारी हित हो सर्वोपरि
सोतीगंज के पास पुल उतरेगा तो यह एक्सीडेंट जोन बन जाएगा। सुनियोजित नक्शा बनाओ ताकि नुकसान न हो। ऐसा न हो कि कहीं लाभ होने की बजाय इसका नुकसान हो जाए। आगामी प्रोजेक्ट का भी ध्यान रखना होगा। इस प्रस्ताव को व्यापारी हित में ध्यान में रखकर ही बनाया जाए। - महामंत्री संयुक्त व्यापार संघ, अरुण वशिष्ठ
ये भी रहे मौजूद
बेगमपुल व्यापार संघ से अध्यक्ष राजेश सिंघल महामंत्री पुनीत शर्मा, विपुल सिंघल, मुकुल सिंघल, संजय गोयल, रतन सहगल, सतपाल सिंह।