तीस रोजों के बाद जिसका इंतजार था वह ईद-उल-फितर का पर्व आज मनाया जा रहा है। गुरुवार को चांद रात में बाजारों में रौनक नहीं हुई। इस बार ईदगाह तो अपनी जगह होंगे लेकिन, वहां ईद की नमाज नहीं होगी। न नए कपड़े होंगे, न ही ईद मिलन की रस्म होगी। गलियां सूनीं ही रहेंगी, इतनी चहल-पहल नहीं होगी, जितनी अमूमन हर ईद पर होती थी।
ईद-उल-फितर को लेकर सभी जगह उत्साह का माहौल है। रोजेदारों की खुशी में कोई कमी नहीं है, वह घर में नमाज अदा कर अल्लाह का शुक्रिया अदा करेंगे। साथ ही कोरोना से निजात के लिए दुआ की जाएगी। रमजान का पाक महीना गुरुवार को खत्म हो गया। रात को ईद के चांद का दीदार होते ही लोगों ने एक-दूसरे को मुबारकबाद देना शुरू कर दिया। पहले घर-परिवार के लोगों को बधाई दी। इसके बाद फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिए अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और शुभचिंतकों को ईद मुबारक के संदेश भेजें।
जामिया दारूस सलाम पांचली बुजुर्ग के मोहतमिम मौलाना यूसुफ कासमी ने हदीस के हवाले से बताया कि जब महामारी का दौर चल रहा हो तो अल्लाह के नबी का फरमान है कि जो लोग जहां है वहीं कायम करें। मौलाना ने सभी से ईद की नमाज घरों में ही अदा करने की अपील की। उन्होंने बताया कि मस्जिदों में केवल तीन से पांच नमाजी ही ईद की नमाज अदा करेंगे। सभी से दूरी बनाकर घर में रहकर फोन पर ही एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देने की बात कही। वहीं मुफ्ती लुकमान हर्रा ने बताया कि शरीयत के अनुसार ईद मनाने से पहले फितरा और जकात अदा करना जरूरी है लेकिन, हालात बहुत बदलते हुए हैं।