आधुनिक तरीके से शिक्षा देने के लिए लगवाए गए थे प्रोजेक्टर
- फोटो : अमर उजाला
केस-1
राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल के कमरे में प्रोजेक्टर लगा था। उसी कमरे में बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। बच्चों से प्रोजेक्टर पर अक्षर ज्ञान सीखने पर बात की गई तो बच्चों ने गर्दन हिलाकर मना कर दिया। शिक्षिका मुकेश गुप्ता ने कहा कि प्रोजेक्टर काफी समय से लगा है। लेकिन इसे चलाने की ट्रेनिंग नहीं दी गई है।
केस-2
उच्च प्राथमिक विद्यालय केसरगंज में एक शिक्षिका तीन बच्चों को पढ़ा रही थीं। जब छात्रों से प्रोजेक्टर चलने की बात पूछी तो एक ने बताया कि एक बार प्रोजेक्टर पर पिक्चर देखी थी। हालांकि प्रधानाध्यापक सरफराज अहमद ने कहा कि प्रोजेक्टर चलाने की किसी के पास ट्रेनिंग नहीं है। जर्जर बिल्डिंग की जगह शिक्षक संघ के हॉल में प्रोजेक्टर लगाया गया है।
केस-3
प्राइमरी पाठशाला पूर्वा महावीर में प्रोजेक्टर लगाया गया है। यहां तीन शिक्षिकाएं कमरे के बाहर धूप में बच्चों को बैठाकर पढ़ा रही थीं। जब अमर उजाला टीम ने बच्चों से प्रोजेक्टर पर पढ़ाई करने पर बात की तो सभी एक दूसरे का चेहरा देखने लगीं। उन्होंने बताया कि दीवार पर लगी मशीन कभी नहीं चली।
आधुनिक तरीके से शिक्षा देने के लिए लगवाए गए थे प्रोजेक्टर
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समय से लगवाए प्रोजेक्टर
सरकार द्वारा चयनित कंपनियों से हमने जिले के 221 स्कूलों में निर्धारित समय के भीतर प्रोजेक्टर लगवा दिए हैं। संचालन की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग की है। -मो. तारिक, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
सभी स्कूलों में प्रोजेक्टर चल रहे हैं। सभी शिक्षकों को कंपनी ने ट्रेनिंग भी दी थी। अगर नहीं चल रहे हैं तो जांच कराई जाएगी। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट ली जाएगी। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। -सतेंद्र ढाका, बीएसए