मेरठ। गणेश चतुर्थी नजदीक आते ही बाजारों में गणेश जी की मूर्तियाें की मांग बढ़ जाती है। इस बार भी पारंपरिक मिट्टी की मूर्तियों की मांग सबसे ज्यादा है। श्रद्धालु पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी मूर्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस साल खासतौर पर इको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियों की मांग सबसे ज्यादा बढ़ी है।
मेरठ में भारत के अलग-अलग हिस्सों से एडवांस बुकिंग हो चुकी है। छोटे आकार की मूर्तियां 100 से 1500 रुपये तक मिल रही हैं। बड़ी मूतियों की कीमत 50 हजार रुपये तक पहुंच रही है। मूर्तियों की ऊंचाई छह से सात फीट तक है। बड़े पंडालों के लिए बनाई जा रही मूर्तियों के दाम लाखों रुपये तक चले जाते हैं।थापर नगर स्थित अजंता मूर्ति कला केंद्र की मूर्तिकार सीमा ने बताया कि ग्राहक भी इस बार नए-नए डिजाइन की मांग कर रहे हैं। पारंपरिक बैठे हुए गणपति के साथ-साथ, मयूर वाहन पर बैठे बप्पा, झूले पर झूलते गणपति, शेष नाग पर बैठे बप्पा, नंदी पर बैठे गणपति, बप्पा का बाल स्वरूप और आधुनिक अंदाज में बनी मूर्तियों की भी लोग खूब डिमांड कर रहे हैं। कैंट क्षेत्र से भी उनके पास विशेष ऑर्डर आते हैं।
मेरठ में बनाई जाने वाली इको फ्रेंडली वाली गणेश जी की मूर्तियां सिर्फ मेरठ ही नहीं बल्कि पूरे देश भर में खरीदी जाती हैं। हरिद्वार, सराहनपुर, देहरादून, जम्मू-कश्मीर आदि कई प्रदेशों से बुकिंग पहले ही कर ली गई है। भक्त गणेश चतुर्थी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जिससे वे भगवान गणेश को जल्द से जल्द अपने घर ला सकें।