बिजली कटौती ने शहर से लेकर गांव तक हाहाकार मचा दिया है। लखनऊ कंट्रोल से लेकर लोकल स्तर पर भी भारी कटौती कराई जा रही है। शुक्रवार को लखनऊ कंट्रोल ने पांच घंटे रोस्टिंग कराई तो लोकल स्तर पर भी दो से तीन घंटे कटौती हुई। वहीं रात साढ़े आठ से साढ़े दस तक फिर से रोस्टिंग हुई। इससे लोग बेहाल हो गए।
अक्तूबर मध्य से शहरों को 24 व गांवों को 16 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा करने वाली सपा सरकार ने फिलहाल शहर से लेकर गांवों तक बिजली का झटका दे दिया है। शुक्रवार को लखनऊ कंट्रोल से सुबह तड़के 2 बजकर 55 मिनट से लेकर 4 बजकर 55 मिनट इमरजेंसी रोस्टिंग कराई गई। इसके बाद सुबह छह बजे से लेकर सात बजे तक और दोपहर में 2 बजकर 35 मिनट से लेकर 4 बजकर 35 मिनट तक इमरजेंसी रोस्टिंग कराई गई। कुल पांच घंटे की रोस्टिंग के अलावा भी लिसाड़ी गेट, पुराना आरटीओ, विकासपुरी, लिसाड़ी रोड, टाउन हाल, रेलवे रोड, मेडीकल, मलियाना एसबी फैक्ट्री, कंकरखेड़ा आदि क्षेत्रों में दो से तीन घंटे तक लोकल कटौती कराई गई। सात से आठ घंटे बिजली कटौती से शहर भर में हाहाकार मचा रहा। सुबह बिजली जाने पर लोगों को पीने का पानी भी नहीं मिल सका।
गांवों को 5 घंटे बिजली
कंट्रोल से मिली जानकारी के अनुसार पिछले तीन दिन से बिजली आपूर्ति का बुरा हाल है। लखनऊ कंट्रोल से लगातार बिजली रोस्टिंग कराने का कोड भेजा जा रहा है। शुक्रवार को भी देहात क्षेत्र में 5 घंटे बिजली आपूर्ति की जा सकी। जबकि शासन की तरफ से गांवों में 14 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है।
9 घंटे कम बिजली मिलने से किसानों की फसल सूखने लगी है। बिजली कर्मियों को भी बिजली संकट के चलते बिजलीघरों के घेराव का डर सताने लगा है। अधिकारियों का कहना है कि लखनऊ कंट्रोल से रोस्टिंग पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है। वहां से कोड आने पर बिजलीघरों की आपूर्ति ठप हो जाती है। इसके चलते कालोनियों में बिजली का वितरण नहीं हो पाता है। लोकल स्तर पर बिजली कटौती लाइन में होने वाले फाल्ट ठीक करने को लिए जाने वाला शटडाउन है।