एनजीटी आदेश के बाद अधिकारियों ने किया डूंगर चर्म शोधन कारखाने का निरीक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहटा। डूंगर गांव में दशकों से संचालित चर्म शोधन कारखाने से फैलने वाले प्रदूषण के चलते एनजीटी द्वारा तत्काल बंद करने के दिए आदेश के बाद जिला प्रशासन ने मामले में संज्ञान लिया है। सोमवार की दोपहर मुख्य विकास अधिकारी नूपुर गोयल और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिला प्रभारी राजेंद्र प्रसाद पूरे अमले के साथ गांव डूंगर में पहुंचे। यहां कारखाने से फैल रहे प्रदूषण को देख अधिकारी दंग रह गए।
रोहटा ब्लॉक क्षेत्र के डूंगर गांव में दशकों से चर्म शोधन कारखाना संचालित है जिसमें गांव के 120 परिवार चमड़ा रंगने का कार्य करते हैं। यह कारखाना 24 वर्ष पूर्व केंद्र व प्रदेश सरकार के सहयोग से 4 करोड़ रुपये की लागत से उच्चीकरण कर संचालित किया गया था। उस समय ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग ने अपने प्रस्ताव में एसटीपी प्लांट लगाने के बजाय कारखाने से निकलने वाले जहरीले पानी को एक नाले का निर्माण कर कारखाना से निकासी कर दूसरे पड़ोसी गांव पूठखास की ओर आजमपुर के जंगल में डाल दिया था। इस नाले की गांव आजमपुर में जाकर कोई निकासी नहीं हुई। पानी रुक जाने से गांव आजमपुर में दुर्गंध ओर गंदगी भरा जीवन जीने के लिए ग्रामीण दशकों से विवश हैं।
प्रदूषण से परेशान ग्रामीण कई साल से प्रदूषण विभाग को शिकायत करते आ रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने गत वर्ष एनजीटी का दरवाजा खटखटाया। कई बार एनजीटी की टीम कारखाने में आई और सैंपल आदि लेकर गई। सैंपल में घातक जहरीले प्रदूषण फैलाने वाले तत्व मिले। इस पर एनजीटी ने जनहित में प्रशासन और प्रदूषण विभाग को तत्काल कारखाना बंद करने के आदेश दिए। कई बार प्रदूषण विभाग ने नोटिस देकर कारखाने को बंद कराने का प्रयास किया। कारखाना बंद होने से 120 परिवार बेरोजगार हो जाएंगे, इस पर विचार विमर्श किया गया।
सोमवार को मुख्य विकास अधिकारी नूपुर गोयल, डीपीआरओ वीरेंद्र यादव प्रदूषण विभाग की टीम के साथ गांव में पहुंचे और कारखाने का जायजा लिया। इसमें मुख्य विकास अधिकारी ने प्रदूषण विभाग को समस्या के समाधान का विकल्प तलाश करने की हिदायत दी। प्रदूषण अधिकारी राजेंद्र प्रसाद को गंदे पानी को ट्रीट करने के लिए सीईपीटी प्लांट लगाने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए। कारखाने में काम कर रहे कर्मचारियों को सीडीओ ने साफ सफाई और मानक के अनुसार ही कार्य करने की हिदायत दी।
बयान...
डूंगर चर्म शोधन कारखाने से निकलने वाले गंदे पानी को ट्रीट करने के लिए सीईपीटी प्लांट लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। प्लांट लगने से कारखाना प्रदूषण मुक्त हो जाएगा। स्टीमेट तैयार करने के लिए विभाग को निर्देश दिए गए हैं। -नूपुर गोयल, सीडीओ
सीईपीटी प्लांट की स्थापना से कारखाना प्रदूषण मुक्त हो जाएगा। जिससे ग्रामीणों को रोजगार भी मिलता रहेगा और पड़ोसी ग्रामीणों को प्रदूषण से भी मुक्ति मिल जाएगी। -गांगेराम शर्मा, जिला सलाहकार, पर्यावरण समिति
डूंगर में चर्मशोधन कारखाने से निकलने वाले प्रदूषण का प्रशासन की टीम ने जायजा लिया।