आउट सोर्स पर 2215 सफाई कर्मियों के अनुबंध की मूल पत्रावली गायब होने का मामला तूल पकड़ रहा है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी और लिपिक ने पत्रावली गायब करने का आरोप पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रेम सिंह पर मढ़ दिया है। नगरायुक्त ने अब तक मामले को दबाने के आरोप में नगर स्वास्थ्य अधिकारी और लिपिक को कार्रवाई की चेतावनी दी है। महापौर के पत्र के बाद निगम प्रशासन ने पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
निगम प्रशासन ने शहर में सफाई कार्य के लिए चार नवंबर 2015 को अलकनंदा कंपनी से अनुबंध किया था। 31 मार्च 2016 तक निगम में नगर स्वास्थ्य अधिकारी की कुर्सी पर डॉ. प्रेम सिंह तैनात थे। इनके ट्रांसफर के बाद डॉ. आरएस चौहान और अब डॉ. कुंवरसेन नगर स्वास्थ्य अधिकारी हैं। आठ माह बाद सफाई अनुबंध की फाइल से मूल पत्रावली गायब होने का मामला प्रकाश में आया है। पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रेम सिंह और कंपनी मालिक के बीच विवाद की परत खुलनी शुरू हुई। हालांकि पत्रावली गायब होने की जानकारी पहले से ही नगर स्वास्थ्य अधिकारी और लिपिक को थी। लेकिन सभी दबाए बैठे रहे। नगर स्वास्थ्य अधिकारी भी फोटो कॉपी फाइल पर ही सफाईकर्मियों का वेतन स्वीकृत करते रहे। डॉ. प्रेम सिंह ने निगम अफसरों की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिह्न लगाना शुरू कर दिया है। वहीं, निगम अधिकारी और लिपिक ने फाइल से पत्रावली गायब होने के लिए डॉ. प्रेम सिंह को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है।
मुझे तो दी नहीं
डॉ. प्रेम ने मुझे अलकनंदा से अनुबंध की मूल पत्रावली वाली फाइल नहीं दी। मैंने उन्हें लिखित में भी इसकी जानकारी दी थी।- राजेश कुमार, लिपिक नगर स्वास्थ्य विभाग
यह है आधार
लिपिक ने मूल पत्रावली डॉ. प्रेम सिंह के पास होने की जानकारी दी है। उसी आधार पर डॉ. प्रेम सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्यवाही होगी।- डॉ. कुंवरसेन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
निर्देश दिए हैं
मैंने नगरायुक्त को पत्र लिखकर जांच कराने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।- हरिकांत अहलूवालिया, महापौर
अब कैसे आरोप
फाइल रखने की जिम्मेदारी लिपिक की होती है। ट्रांसफर के आठ माह बाद फाइल गुम होने के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। जबकि कंपनी को गलत तरीके से ठेका संचालन में निगम अफसरों का पूरा हाथ है। ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए ही मेरे खिलाफ केस दर्ज कराने की बात कही जा रही है। - डॉ. प्रेम सिंह,