अब तो हवा का भी कारोबार खड़ा हो रहा
प्रदूषण के लिए सबसे बड़ा दोषी शहरीकरण है। पानी खराब होने पर विश्व में बोतलों का 53.8 अरब का व्यापार खड़ा हो गया है। ग्रोथ ऑफ रेट सात प्रतिशत है। अब हवा का नंबर लग गया, हवा के लिए भी प्यूरीफायर का व्यापार शुरू हो रहा है। सवाल ये है कि हम क्या कर रहे हैं। विकल्प भी कारोबारी निकाल रहे हैं। अच्छी हवा के लिए हम पहाड़ों की तरफ भाग रहे हैं। वहां भी हालात खराब हो रहे हैं। प्रकृति ने हमें पैदा किया, हम उसे ही मार रहे हैं। दिल्ली की हवा खराब हो रखी है। देश के चीफ जस्टिस, प्रधानमंत्री, मंत्रियों और अधिकारियों के यहां एयर प्यूरीफायर लग गए हैं या लग जाएंगे। पर यह बहुत घातक है। प्रकृति आपकी इम्युनिटी को बढ़ाती है, ऐसे प्यूरीफायर शरीर को भी खराब कर देते हैं।
मेरठ-उत्तराखंड से ही करेंगे क्रांति
अनिल जोशी ने कहा कि इटावा, इंदौर और मेरठ में जागरूक नागरिक हैं। मेरठ में क्रांति के संस्कार भी हैं। उत्तराखंड में चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई थी। मेरठ और उत्तराखंड मिलेंगे तो देश में नई क्रांति की शुरुआत करेंगे। साइकिल यात्रा और गोष्ठी आदि के माध्यम से पर्यावरण बचाने के लिए राष्ट्रीय आंदोलन खड़ा करने की आवश्यकता है। फरवरी-मार्च से आंदोलन शुरू करेंगे। इसमें हर वर्ग को भूमिका निभानी होगी।
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