मामले की जानकारी देते अधिवक्ता
- फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरनगर में आठ साल पहले पुरकाजी क्षेत्र में दो किसानों की दो लाख रुपये की फिरौती के लिए अपहरण कर हत्या के मामले में अदालत ने एक हत्यारे को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इसे विरल से विरलतम श्रेणी का अपराध माना है। अदालत ने साक्ष्य के अभाव में पांच आरोपी बरी कर दिए।
पुरकाजी थाना क्षेत्र के गांव नंगला दुहैली निवासी महावीर सिंह ने आठ दिसंबर 2011 को किसानों की हत्या के मामले में पुरकाजी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया था कि उसका बेटा ज्ञान सिंह गांव के ही अपने साथी राजपाल पुत्र चंद्रभान के साथ साइकिल से बीज भंडार खाईखेड़ी गए थे। रास्ते में उनका अपहरण कर लिया गया। बदमाशों ने उनकी रिहाई के लिए दो लाख रुपये की फिरौती मांगी। पुलिस ने फिरौती मांगने वाले की मोबाइल नंबर की सर्विलांस से जांच की तो वह नंबर भोपा थाना क्षेत्र के गांव सीकरी निवासी वकील पुत्र नसीम का मिला। पुलिस को वकील ने बताया कि उसका फोन उसके भाई कलीम उर्फ कालू के पास है। पुलिस ने कलीम को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर 15 दिसंबर 2011 को दतियाना गांव के जंगल से दोनों अगवा किसान ज्ञान सिंह और राजपाल के गोली लगे शव बरामद किए थे।
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इसके बाद पुलिस ने कलीम समेत छह आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में पेश किए थे। इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे-11 राजेश भारद्वाज की अदालत में हुई। अदालत ने बुधवार को गांव सीकरी निवासी कलीम उर्फ कालू पुत्र नसीम को किसानों का अपहरण कर हत्या के मामले में दोषी करार दिया था। गुरुवार को अदालत ने हत्यारे कलीम को फांसी की सजा सुनाई।
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