मेरठ। सरकार परिषदीय स्कूलों में खेलों को प्रोत्साहित कर रही है। वहीं, दूसरी ओर अधिकतर स्कूलों में शासन से मिली खेल के सामान के लिए धनराशि की बंदरबांट कर ली गई है। कहीं खेल का सामान नहीं खरीदा गया तो कुछ विद्यालयों में घटिया सामान खरीदकर उच्च अधिकारियों को गलत रिपोर्ट भेज दी।
जिले में 910 प्राथमिक एवं 432 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। शासन ने प्राथमिक विद्यालय के लिए पांच हजार रुपये तथा उच्च प्राथमिक के लिए दस हजार रुपये के हिसाब से धनराशि भेजी। इस प्रकार प्राथमिक विद्यालयों में 45 लाख 50 हजार रुपये और उच्च प्राथमिक में 43 लाख 20 हजार रुपये खेल सामग्री के लिए स्वीकृत किया गया था। स्कूल प्रबंध समिति, प्रधान अध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्यालय में आवश्यकता अनुसार खेल सामग्री खरीदी जाए। अधिकतर विद्यालयों में सरकारी धन की बंदरबांट कर ली गई। इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों और जिला प्रशासन से शिकायत की गई। जिसमें कहा कि कैरम बोर्ड, लूडो, प्लास्टिक के बैट बॉल, बास्केटबॉल, फुटबॉल, रस्सी और अन्य सामान खरीदा जाना था। यह सामान मानक के अनुरूप नहीं खरीदा गया। यह भी आरोप लगाया कि सबसे ज्यादा दौराला ब्लॉक में हेराफेरी की गई है।
नहीं कराई जा रही जांच
जिला स्तर के अधिकारी स्कूलों में न तो सामान की जांच कर रहे हैं और न ही एबीएसए ने इस संबंध में रिपोर्ट मांगी। वहीं, प्रभावशाली शिक्षक अधिकारियों पर दबाव बनवाकर अपना बचाव करने में जुट जाते हैं। रजपुरा प्राथमिक विद्यालय और इसी गांव का उच्च प्राथमिक विद्यालय में देखा जाए तो सच्चाई सामने आएगी।
जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो जांच करके कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में पूर्व में जो सामान खरीदे गए हैं उनकी रिपोर्ट मांगी जाएगी।-सतेंद्र ढाका, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी