गर्मी बढ़ते ही बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही चोरी के मामले भी बढ़ गए हैं। विद्युत निगम के अनुसार शहर के पांच बिजलीघर क्षेत्रों में 50 फीसदी तक बिजली चोरी हो रही है। कई फीडरों पर यह आंकड़ा 70 फीसदी तक है। ऐसे में बिजली चोरी का ग्राफ नीचे रखने के लिए विद्युत अधिकारी कटौती कर रहे हैं। इसका दंश इन क्षेत्रों में रहने वाले उन ईमानदार उपभोक्ताओं को भी भुगतना पड़ रहा है, जो समय से बिजली बिल का भुगतान कर रहे हैं। साथ ही बिजली चोरी भी नहीं करते हैं।
प्रदेश सरकार ने गांवों के लिए 18, तहसील/नगर पंचायत के लिए 20 और जिला मुख्यालय के लिए 24 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल जारी किया हुआ है। ट्रांसमिशन से बिजलीघरों को इस शेड्यूल से ही बिजली आपूर्ति की जा रही है, लेकिन बिजलीघरों से उक्त क्षेत्र में उतनी आपूर्ति नहीं हो रही है। लाइन मेंटीनेंस, पेड़ों की छटाईं, लोड वृद्धि और फाल्ट के नाम पर आपूर्ति बाधित होती है। लेकिन सबसे बड़ा खेल बिजली चोरी के लिए चर्चित हो चुके इलाकों में हो रहा है। बिजली चोरी रोको अभियान चलाकर कुछ हद तक सफल हुए अधिकारी चोरी का ग्राफ कम करने के लिए बिजली कट का सहारा ले रहे हैं।
यहां होती है सबसे ज्यादा बिजली चोरी
शहर के 33 केवी लिसाड़ी गेट, लिसाड़ी रोड, विकासपुरी, नौचंदी, हापुड़ रोड आदि बिजलीघर क्षेत्रों में सबसे अधिक बिजली चोरी होती है। इन बिजलीघरों पर औसतन 45 से 50 फीसदी बिजली चोरी है। जबकि इनके 11 केवी के कई फीडर तो ऐसे है जहां 70 फीसदी तक चोरी होती है। गर्मी में यह आंकड़ा और भी ज्यादा बढ़ जाता है। पीवीवीएनएल अधिकारियों का मानना है कि बिजली चोरी रोकने के लिए कट ही एकमात्र उपाय है।
उपभोक्ता बोले, हमारी क्या गलती
प्रहलाद नगर निवासी आदित्य शर्मा, विकासपुरी निवासी शाहिद अली, निजाम गाजी, मोहम्मद हसन राणा, श्यामनगर निवासी हाजी इकबाल, हाजी अमीरुद्दीन कुरैशी और जावेद ने बताया कि वे समय से बिजली का बिल भुगतान करते हैं। साथ ही स्वीकृत लोड ही इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने अपने घर के बाहर ही मीटर भी खुद ही लगवाए हैं, लेकिन उन्हें भी भरपूर बिजली नहीं मिलती है। बिजली चोरी बचाने के लिए कभी भी बिजली कटौती कर दी जाती है। पूछने पर फाल्ट बताया जाता है।
वर्जन
बिजली चोरी रोकने के लिए बड़े पैमाने पर सुधार कार्यक्रम चल रहा है। सर्वदा योजना के तहत बिजली चोरी कर रहे उपभोक्ता स्वत: घोषणा करके बिना जुर्माने के योजना का लाभ ले सकते हैं। 20 जून को योजना बंद होगी। इसके बाद बिजली चोरी पर फिर से शिकंजा कसा जाएगा। सभी अधिकारियों को शेड्यूल अनुसार बिजली आपूर्ति के निर्देश दिए गए हैं। - अभिषेक प्रकाश, एमडी पीवीवीएनएल मेरठ