पशुओं के चारे के लिए मिलते हैं मात्र 30 रुपये
भागूवाला का गोसंरक्षण केंद्र को जिला पंचायत बिजनौर ने दिसंबर 2018 में अपने कब्जे में लिया था। जिला पंचायत का दावा था कि क्षेत्र के भूमाफिया इस भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करना चाहते थे। भूमि को कब्जामुक्त कराकर जिला पंचायत ने गोसंरक्षण केंद्र शुरू किया था। भागूवाला के गोवंश केंद्र पर तैनात कर्मचारी रवि ने बताया कि गोवंश के खाने के लिए प्रति पशु 30 रुपए प्रतिदिन खर्च मिलता है। इतनी कम धनराशि में पशुओं को भरपेट चारा दे पाना मुश्किल होता है। कर्मचारी ने काफी समय तक पारिश्रमिक न मिलने और पशुओं के लिए चारे की धनराशि मिलने में विलंब होने से अपने पास से व्यवस्था जुटाने की बात कही।
गोवंशों की स्थिति दयनीय
भागूवाला गोसंरक्षण केंद्र पर गोवंशों को पर्याप्त चारा, पानी और इलाज न मिलने से गोवंशों की स्थिति काफी दयनीय है। गोवंश की देखभाल के लिए एक कर्मचारी तैनात है, वह भी अक्सर नदारद रहता है। इससे गोवंश भूखे-प्यासे रहते हैं।
पॉलिथीन बनती है पशुओं की मौत का कारण
भागूवाला के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. कर्मवीर राज सिंह ने एसडीएम को बताया कि गोसंरक्षण केंद्र में आवारा पशु रखे जाते हैं। अधिकांश पशु पॉलिथीन आदि खाने से गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं, जिसके कारण उनकी मौत होती है।
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