दिल्ली के डॉक्टर श्रीकांत गौड़ के अपहरण के मामले में आरोपी विवेक मोतला निवासी दादरी को मेरठ एसटीएफ ने पकड़ लिया। अभी पांच आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश में दिल्ली पुलिस और एसटीएफ लगी हुई है। एसपी एसटीएफ आलोक प्रियदर्शी व उनकी टीम ने मुखबिर की सूचना पर विवेक मोतला को भैसाली अड्डे के पास एक होटल से गिरफ्तार किया है। एसटीएफ की टीम आरोपी को सदर बाजार थाने ले गई और पूछताछ की। उसने बताया कि छह जुलाई को दिल्ली के प्रीत विहार से डॉक्टर श्रीकांत का अपहरण किया था। तभी से वह डॉक्टर के साथ था। मुख्य आरोपी सुशील व अनुज ने डॉक्टर को पहले रोहटा रोड, बिजनौर, एनएच-58 हाईवे स्थित कुंडा गांव व फिर शताब्दीनगर में बंधक बनाकर रखा था। दिल्ली पुलिस से मुठभेड़ के दौरान वह शताब्दीनगर से अपने साथियों का खाना लेने के लिए बाजार में गया था। वह बाजार में था तो उसको जानकारी मिली थी कि दिल्ली पुलिस ने छापा मारकर डॉक्टर को छुड़ा लिया। पुलिस ने उसके साथी प्रमोद को गोली मार दी है और अमित, नेपाल और सोहनवीर को भी गिरफ्तार कर लिया। तभी वह बाजार से भाग गया था। इंस्पेक्टर एसटीएफ धर्मेंद्र यादव का कहना है कि इस मामले में अभी सुशील, अनुज, गौरव समेत पांच आरोपी फरार हैं। जिनकी तलाश जारी है।
आरोपी बोला- 20 जुलाई को डॉक्टर को करना था हरिद्वार शिफ्ट
सदर बाजार थाने की हवालात में बंद आरोपी विवेक मोतला ने कई राज खोले। उसने कहा कि अगर 19 जुलाई को दिल्ली और मेरठ पुलिस शताब्दीनगर में दबिश नहीं देती तो उसका एक भी साथी नहीं पकड़ा जाता। क्योंकि अगले दिन (20 जुलाई) डॉक्टर को हरिद्वार में शिफ्ट करने का प्लान बनाया था। मुख्य आरोपी सुशील ने कहा था कि हरिद्वार जाते ही डॉक्टर को मारो या फिर उसको छोड़ दो। मास्टर माइंड सुशील ने डॉक्टर के अपहरण में शामिल साथियों से 18 जुलाई को कहा था कि अगर फिरौती नहीं मिली तो अपनी जान बचाओ, क्योंकि पुलिस उनकी घेराबंदी में जुटी थी। 20 जुलाई को सभी को हरिद्वार में पहुंचने की बात कही थी। फिरौती न मिलने और डॉक्टर को बंधक बनाकर रखना उनको अब भारी होने लगा था। पुलिस उनको नहीं पकड़ती तो डॉक्टर के साथ कुछ भी हो सकता था। हरिद्वार से डॉक्टर को ट्रेन में बैठाकर भेजने की बात पर सहमति बनी थी। लेकिन दो साथी बोल रहे थे कि अगर डॉक्टर को जिंदा छोड़ा तो पुलिस को वह सारी बातें बताएगा। उसकी हत्या करने का भी प्लान बनाया गया।
पुलिस के आगे-आगे भागे बदमाश
यूपी पुलिस
आरोपी विवेक ने बताया कि डॉक्टर का अपहरण कर मेरठ लाए थे। दो दिन रोहटा रोड स्थित एक मकान में रखा। दूसरे दिन डॉक्टर को वेदव्यासपुरी में गौरव शर्मा के मकान में रखा। चौथे दिन सुशील का फुफेरा भाई प्रमोद वहां पहुंचा। प्रमोद डॉक्टर को कार से बिजनौर ले गया।, जहां उसे एक फ्लैट में रखा गया। वहां से सुशील, अनुज, विवेक और गौरव डॉक्टर को लेकर बागपत के लिए चले गए। आरोपी जगह बदल-बदलकर फिरौती मांगते रहे। ओला कैब कंपनी से फिरौती की रकम लेने के लिए सुशील ने बागपत में आने की बात कही थी। आरोपी डॉक्टर को लेकर घूमते रहे और पुलिस उनके पीछे भागती रही।
खून लगाकर बनाई वीडियो भेजी
आरोपी ने बताया कि एक बार ओला कंपनी वालों का मैसेज आया कि वीडियो भेजो। सुशील ने इसके बाद अपना थोड़ा सा खून निकालकर एक चाकू पर लगाया और चाकू डॉक्टर के हाथ की नस पर रखकर उसे धीरे-धीरे चलाने लगा। चाकू पर खून लगा होने के कारण ऐसा लग रहा था जैसे की नस से खून निकल रहा हो।
पांच सौ के नोट लेने से किया इंकार
वीडियो बनाकर आरोपियों ने कंपनी के अधिकारियों को भेज दी थी। तभी ओला वाले बोले कि पैसा बताओ कहां भेजना है। बागपत के जंगल में पैसा लेने की बात हुई। ओला कंपनी के अधिकारी पैसा लेकर भी आए, लेकिन उन्होंने नोट पांच सौ के बताए। जिस पर वह नाराज हो गए और बोले कि सभी नोट दो दो हजार के होने चाहिए। इसके बाद कंपनी के अधिकारी लौट गए।
दोस्ती में बर्बाद हो गया
विवेक ने बताया कि उस पर बहुत कर्जा है। अनुज उसका पुराना दोस्त था। अपहरण से पहले अनुज ने उससे कहा था कि बस एक काम करना है, तेरा सारा कर्जा उतरवा दूंगा। अनुज ने उसे ये भी आश्वासन दिया कि अगर कहीं मामला खुल भी गया तो अकेला सुशील जेल जाएगा। उसकी जमानत हम सब करा लेंगे। विवेक ने बताया कि वह लालच में आ गया और दोस्ती में बर्बाद हो गया।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/