लावड़। कस्बे व आसपास के लोगों को चौबीस घंटे आपातकाल सेवा मिल सके। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगभग 12 साल पहले चिकित्सकों के लिए आवास बनाए थे। हालांकि यहां आज तक कोई चिकित्सक नहीं ठहरा है। जिस कारण आवास खंडहर होने के कगार पर हैं।
12 वर्ष पहले बनाए थे आवास
स्वास्थ्य विभाग ने लगभग 12 वर्ष पहले लाखों रुपये खर्च करके कस्बा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों के लिए आवास बनाए थे। उस दौरान स्वास्थ्य विभाग ने यह सोचकर आवास बनाए थे कि कस्बे व आसपास के लोगों को चौबीस घंटे इमरजेंसी सेवा मिल सकेगी। दरअसल लावड़ कस्बे से दर्जनों गांव जुड़े हैं। कस्बे से सीएचसी दौराला की दूरी लगभग आठ किमी है और कई गांव ऐसे हैं जिनकी दूरी 15 किमी है। यही सोचकर आवास का निर्माण कराया गया। कई चिकित्सक यहां आए, लेकिन वे दो बजते ही शहरों के लिए रवाना हो जाते हैं। जिस कारण कस्बे में दो बजे के बाद लोगों को चिकित्सकों की सेवा नहीं मिल पाती है।
खंडहर हुए आवास, आवास में भरा सामान
चिकित्सकों के लिए बनाए गए आवास रखरखाव के अभाव खंडहर होने के कगार पर है। यही नहीं एक आवास में सामान रखा हुआ है। जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर की हालत भी बदहाल है। बारिश से परिसर में कीचड़ व जलभराव की स्थिति बनी हुई है। कई बार नगर के लोगों ने चिकित्सकों को यहां आवास में ठहरने के लिए अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
झोलाछाप करते हैं जेबे ढीली
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लावड़ की बात करें तो यहां से लावड़, महल, खरदौनी, चिंदौड़ी, मवी, अझौता, देदवा, मीठेपुर, समसपुर, चरला, गड़ीना, जलालपुर, अंदावली आदि गांव जुड़े हैं। स्वास्थ्य केंद्र दो बजे बंद हो जाने और चिकित्सकों के आवास में नहीं रुकने के कारण इन गांवों से आने वाले मरीजों को मजबूरी में झोलाछाप से उपचार कराना पड़ता है। झोलाछाप मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करते हैं। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण क्षेत्र में झोलाछाप की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है।
चिकित्सकों को रात में आवासों में ठहरने के लिए उनकी रंगाई पुताई के साथ-साथ उन्हें ठीक कराने के लिए सरकार से बजट मांगा गया था, लेकिन आज तक नहीं आया है। आवासों की हालत अधिक खराब है, जिस कारण चिकित्सक वहां रुकना नहीं चाहते है। शासन को दोबारा पत्र भेजा जाएगा। -राजकुमार, सीएमओ मेरठ