नगम निगम द्वारा डाला गया शहर का कूड़ा
- फोटो : अमर उजाला
मंगतपुरम में कूड़े की पहाड़ी के नीचे ही मृत पशुओं को काटा जाता है। पशुओं के अवशेष खाने के लिए 100 से अधिक कुत्तों का झुंड यहां रहता है। मृत पशुओं का मांस खाकर सभी कुत्ते आदमखोर हो चुके हैं। यहां से गुजरना जान को जोखिम में डालने के बराबर है। स्थानीय लोगों की माने तो ये आदमखोर कुत्ते कई बार बच्चे और अन्य लोगों पर हमला बोल चुके हैं। इतना ही नहीं आदमखोर कुत्ते पशुओं के अवशेष को पूरे क्षेत्र में फैला देते हैं। जिससे पूरा क्षेत्र गंदगी में तब्दील है।
नगर निगम लगातार डाल रहा है कूड़ा
नगर निगम प्रशासन ने भले ही एनजीटी में जवाब दाखिल करते हुए मंगतपुरम में कूड़े की पहाड़ी न होने की बात कही हो, लेकिन धरातल पर स्थिति महानगर की 20 लाख जनसंख्या से छुपी नहीं है। अभी भी प्रतिदिन महानगर का कूड़ा मंगतपुरम में डाला जा रहा है। कूड़े को पहाड़ी के ऊपर पहुंचाने के लिए एक पोर्कलेन मशीन भी लगायी हुई है।
कुष्ठ रोगी भी न्यायालय की शरण में
मंगतपुरम में डाले जा रहे कूड़े को लेकर कुष्ठ रोगी भी न्यायालय पहुंच गए हैं। कारण है कि कूड़े से निकलने वाली गैस और बदबू में 105 कुष्ठ रोगियों के जीवन पर संकट खड़ा हो गया है। कुष्ठ रोगी बैरागी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जिसमें उन्होंने कूड़े की पहाड़ी को हटवाने और भविष्य में कूड़ा न डलवाने की मांग रखी है।
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