मेरठ। दीपावली का संबंध जहां भगवान राम के अयोध्या लौटने से है। वहीं, दूसरी तरफ दीपावली का त्योहार भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में भी मनाया जाता है l जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान श्री महावीर स्वामी को इस दिन मुक्ति लक्ष्मी की प्राप्ति हुई थी।
भगवान महावीर त्रयोदशी के दिन ध्यान में बैठ गए थे। इसीलिए इस पर्व को ध्यान त्रयोदशी के नाम से मनाया जाता है। यही धीरे-धीरे नाम बदलकर ध्यान तेरस एवं धनतेरस प्रचलित हो गया। त्रयोदशी के दिन सभी ने बड़े उत्साह पूर्वक भगवान महावीर का ध्यान किया। इसके साथ लौकिक परंपरा के अनुसार जरूरत की खरीदारी की। भगवान महावीर दो दिन ध्यान में रहने के उपरांत अमावस्या की भोर में सभी कर्मों को नष्ट कर शरीर छोड़कर निर्वाण को प्राप्त हो गए। इसी उपलक्ष्य में दीपावली के दिन सुबह को सभी जैन लोग उत्साह के साथ मंदिर में जाते हैं। भगवान की पूजा करने के पश्चात निर्वाण पूजा पढ़कर चीनी शक्कर का लाडु चढ़ाते हैं। मुनि प्रवक्ता सुनील जैन के अनुसार इसी कड़ी में आनंदपुरी स्थित जैन मंदिर में 15 नवंबर की सुबह भगवान महावीर की पूजा के उपरांत भगवान की प्रतिमा के समक्ष 24 किलो का लड्डू चढ़ाया जाएगा तथा अन्य कार्यक्रम होंगे।