सुनील कैथवास....सीसीएसयू के अटल ऑडिटोरियम में द रॉयल इंडियन क्लब द्वारा आयोजित सैयारा नाटक की प
- शहर के हजारों परिवार और उनकी संतानों के दर्द को बयां कर गई प्रस्तुति
- राॅयल इंडियन क्लब के कार्यक्रम में जूही बब्बर ने हर दर्द पर लगाया मरहम
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। तलाकशुदा महिला का जीवन क्या होता है। उसके सामने कितनी कठिनाई आती हैं। हर कोई उसे अपनी जागीर समझता है। वह महिला किस नीरस जिंदगी में जीती है। विपरीत परिस्थितियों के बीच वह महिला स्वयं को राष्ट्र और विश्व स्तर पर स्थापित करती है। हर चुनौती का सामना करती है। इस अभिनय को अभिनेत्री जूही बब्बर ने सैयारा के रूप में जीवंत कर दिया। इस नाटक का मंचन मेरठ में दूसरी बार हुआ चाैधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय में हुआ। हर दृष्य उनको स्वयं से जुड़ा सा महसूस हुआ।
चाैधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय अटल सभागार में राॅयल इंडियन क्लब के मंच पर हुआ। बॉलीवुड के प्रसिद्ध कलाकार राजबब्बर की पुत्री जूही बब्बर ने इस नाटक की दूसरी बार मेरठ में ऐतिहासिक प्रस्तुति दी। मंच पर प्रस्तुति देते हुए सैयारा ने दिखाया कि कहानी की शुरुआत उसके अतीक के पन्नों से होती है। मुंबई की एकल परिवार महिला सैयारा दो बार तलाक से उबरने के बाद अपनी किताब के लिए परेशान है। सैयारा एक बड़े कारोबारी की बेटी है। सैयारा दो शादियों के बाद भी अपने पति से प्रताड़ित होती है।
नाटक में दिखाया गया कि सैयारा ने अपने से 24 साल बड़े प्रोफेसर से शादी की। प्रोफेसर का पूरा परिवार था। प्रोफेसर के बच्चों को इस बात की जानकारी हुई तो विवाद हो गया। तलाक के बाद सैयारा को माता-पिता का हौसला मिला। सैयारा ने पिता का कारोबार संभाला। इस बीच उसकी जिंदगी में एक चिकित्सक आता है। हालांकि उसे यहां भी धोखा मिलता है। सैयारा के रूप में जूही ने इस प्रस्तुति में दिखाया कि महिला अपने जीवन में किन परिस्थितियों से गुजरती हैं। विपरीत परिस्थितियों में महिलाओं के साथ पुरुष भी मानसिक परिस्थितियों से ग्रस्त हो जाते हैं। जूही बब्बर ने कहा कि सफल वैवाहिक जीवन के लिए एक दूसरे पर विश्वास बहुत जरूरी है। अगर पति और पत्नी के बीच विश्वास होगा तो कोई आपके रिश्तों को प्रभावित नहीं कर सकता है। कार्यक्रम में अमित अग्रवाल, अंबरीश अग्रवाल, डॉ. सुधांशु, मयूर मित्तल, सोमिल गुप्ता, अखिल गर्ग, शरद जिंदल, मोहित गुप्ता और अमित गुप्ता आदि माैजूद रहे।