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नगर निगम के गले की हड्डी बना कूड़े का निस्तारण

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नगर निगम के गले की हड्डी बना कूड़े का निस्तारण
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मेरठ। शहर में प्रवेश करते ही कूड़े के पहाड़ आगंतुकों का स्वागत करते हैं। कूड़ा और गंदगी की वजह से ही शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण सर्वे में पिछड़ना पड़ रहा है। एनजीटी और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण लगातार फटकार लगा रहा है। इसके बावजूद नगर निगम अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं। केंद्र सरकार को इस दिशा में चल रही कार्रवाई दिखाने के लिए गांवड़ी में लगा एक बेहद छोटी क्षमता का बैलेस्टिक सैपरेटर प्लांट का दिखा दिया जाता है। शासन से स्वीकृत हो चुके लोहियानगर कूड़ा निस्तारण प्लांट का काम भी तेजी नहीं पकड़ पा रहा है।
शहर से हर रोज करीब 900 टन कूड़ा निकलता है। इसे हापुड़ रोड स्थित लोहियानगर स्थित डंपिंग ग्राउंड पर डंप किया जा रहा है। कूड़ा का पहाड़ दिखते ही आगंतुकों के सामने गंदे शहर की तस्वीर उभर जाती है। वहीं, दिल्ली रोड पर मंगतपुरम में भी कूड़े का पहाड़ खड़ा है। यहां करीब 20 लाख टन कूड़ा जमा है। दोनों मुख्य मार्गों पर बने कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने के लिए नगर निगम गंभीरता नहीं दिखा पा रहा है। काली नदी किनारे गांवड़ी गांव में डाले जा रहे कूड़े के निस्तारण के लिए निगम कूड़ा छांटने वाला छोटा सा प्लांट लगाकर उसका प्रचार-प्रसार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। इस प्लांट में 100 से 150 टन कूड़ा ही प्रतिदिन निस्तारित किया जा रहा है। इससे निकलने वाली प्लास्टिक का ढेर यही पर लगा है। अभी तक इसे बेचा नहीं जा सका है।
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पिछले दिनों एनजीटी ने गांवड़ी से कचरा नहीं हटाने पर कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा था। साथ ही सेवानिवृत्त जज एसवीएस राठौर की अध्यक्षता में गठित द ओवरसाइट कमेटी को निगम के दावों की जांच कर रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले देने को कहा था। शनिवार को पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण के चेयरमैन डॉ. भूरेलाल ने लोहियानगर में कूड़े के पहाड़ को लेकर न केवल कड़ी नाराजगी जताई, बल्कि निगम व प्रशासन अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कूड़ा तुरंत हटाने को कहा था। नालों की गंदगी को लेकर भी नाराजगी जताई है।
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लोहियानगर में दिसंबर तक प्लांट लगाने का दावा
नगर निगम अधिकारी लोहियानगर डंपिंग ग्राउंड पर दिसंबर तक गांवड़ी की तर्ज पर बैलेस्टिक सैपरेटर प्लांट लगाने का दावा कर रहे हैं। सहायक नगर आयुक्त ब्रजपाल सिंह का कहना है 300 टन प्रतिदिन क्षमता का प्लांट शासन से स्वीकृत हो चुका है। प्लांट चलाने के लिए बहुत से विभागों की एनओसी लेनी होती है। दिसंबर तक प्लांट चालू होने की संभावना है। गांवड़ी में भी अब ज्यादा कूड़ा नहीं बचा है। अगले कुछ महीनों में यहां के कूड़े को खत्म कर दिया जाएगा। कूड़े से निकले आरडीएफ (प्लास्टिक) को कूड़े से बिजली बनाने वाले संयंत्र को आपूर्ति किया जाएगा।
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