मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में भारत अमेरिकी संबंध विषय पर समूह चर्चा का आयोजन किया गया। चर्चा में राजनीति विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। अंतरराष्ट्रीय संबंध, व्यापार, टैरिफ, प्रौद्योगिकी और वैश्विक साझेदारी जैसे विषय पर आयोजित इस चर्चा में विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। चर्चा संवादात्मक ढंग से हुई। इसमें विभिन्न दृष्टिकोण सामने आए और भारत की वैश्विक स्थिति पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणियां की गईं।
सत्र की शुरुआत बीए (ऑनर्स) की छात्रा सिल्की ने की। उन्होंने विषय का परिचय देते हुए सभी का स्वागत किया और चर्चा की दिशा निर्धारित की। इसके बाद अन्वेषा ने अंतरराष्ट्रीय मामलों पर अपना दृष्टिकोण रखा। सृजन अवस्थी ने विश्लेषणात्मक विचार साझा किए। वहीं गोहर जन्नत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में इस समय भारत को चीन को गंभीरता से लेना चाहिए और इनके दीर्घकालिक परिणामों पर ध्यान देना आवश्यक है। शैलजा पारस, गुलिस्ता और साक्षी ने भारत की वैश्विक राजनीति में बढ़ती अहमियत को रेखांकित किया।
दीपांशी ने भारत-अमेरिका संबंधों और ट्रम्प प्रशासन की व्यापार नीति पर चर्चा की। उन्होंने हेनरी किसिंजर की उक्ति का उल्लेख किया कि ‘अमेरिका से मित्रता, शत्रुता से अधिक खतरनाक है।’ खुशी ने कहा कि भारत के पास अनेक व्यापारिक विकल्प हैं और वह वैश्विक मंच पर सशक्त भूमिका निभा सकता है। सृजन अवस्थी ने पुनः चीन की अविश्वसनीयता पर प्रकाश डाला। इसके बाद सिल्की ने ट्रंप-बोल्सोनारो समझौते पर विचार रखे। दीपांशी ने दूसरी बार टेस्ला, व्यापार और आधुनिक आर्थिक साझेदारी के महत्व पर चर्चा की।
अंत में चर्चा का निष्कर्ष निकला कि भारत को केवल अमेरिका पर निर्भर नहीं होना चाहिए, बल्कि बहुस्तरीय संबंधों को प्राथमिकता देनी चाहिए। दीपांशी और सृजन अवस्थी की सक्रिय भागीदारी ल समग्र रूप से यह समूह चर्चा अत्यंत रोचक और ज्ञानवर्धक रही। इसमें विद्यार्थियों ने भारत की वैश्विक साझेदारी, व्यापारिक संबंध, प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा विदेश नीति की चुनौतियों पर विभिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।
छात्रों ने रणनीतिक गठबंधनों की आवश्यकता, स्वतंत्र निर्णय-क्षमता और विश्व मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव पर विशेष बल दिया। कुल मिलाकर, यह सत्र भारत-अमेरिकी संबंधों पर आलोचनात्मक चिंतन और जागरूकता के लिए एक उपयोगी मंच सिद्ध हुआ। अंत में समाहार डॉ. मुनेश कुमार, सहायक आचार्य राजनीति विज्ञान ने किया। डॉ. जयवीर सिंह, डॉ. सुषमा रामपाल, डॉ. भूपेंद्र सिंह, डॉ. देवेंद्र और डॉ. चंचल उपस्थित रहे।