शहरकाजी प्रोफेसर जैनुस साजिद्दीन सिद्दीकी
- फोटो : Amar Ujala Meerut
मैं प्रस्तुत करता हूं कि मैं तेरह सौ वर्षों से भारत में व्यक्तिगत कानूनों (इस्लामी कानूनों) के अनुसार रह रहा हूं और इस लंबे इतिहास में मैंने कभी नहीं देखा कि किसी सरकार ने इसमें हस्तक्षेप किया हो इस विविध लोकतांत्रिक देश में रहना बहुत खूबसूरत है और हम अपनी विविधता और अनेकता में एकता के लिए दुनिया में जाने जाते हैं।
इसलिए आपसे विनम्र अनुरोध है कि कृपया हमारी विविध संस्कृति का सम्मान करें हमारे व्यक्तिगत कानूनों का सम्मान करें और हमें किसी समान नागरिक संहिता की आवश्यकता नहीं है।
जमीयत उलमा ए हिंद की ओर से समान नागरिक संहिता को लेकर ये मैसेज विरोध के रूप में मेल किया जा रहा है। जो मेल आईडी membersecretary-lci@gov.in पर लोगों को भेजने के लिए विरोध जताने के लिए कहा जा रहा है।
मौलाना अरशद मदनी व मौलाना महमूद मदनी की ओर से लोगों को बिना सड़क पर उतरे विरोध प्रदर्शन करने के निर्देश हैं। जमीयत उलमा ए हिंद के पदाधिकारी मस्जिदों और घरों में जाकर लोगों से मेल आईडी से विरोध करने की अपील कर रहे हैं। हालांकि उलमाओं के साथ मुस्लिम समाज के लोग भी समान नागरिक संहिता का सीधा विरोध करते नजर आ रहे हैं।
समान नागरिक संहिता को लेकर सरकार को उलमा के साथ बैठक करनी चाहिए। यह मुस्लिमों पर थोपेंगे तो इसके परिणाम भी गलत आ सकते हैं। ऐसे में देश में अच्छा माहौल कायम रखने के लिए सभी धर्म के लोगों की भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए। - मौलाना मशहूदुर रहमान जमाली
समान नागरिक संहिता किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे। खुलकर इसका विरोध कर रहे हैं और आगे भी करेंगे। सरकार को इस पर विचार करना होगा। - इमरान सिद्दीकी, समाजसेवी
सरकार को समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले सोचना चाहिए। लोकतांत्रिक देश में सभी धर्माें के लोगों को अपने धर्म के हिसाब से रहने का अधिकार है। - अकरम गाजी, व्यापारी भगत सिंह मार्केट
समान नागरिक संहिता को लेकर मौलाना अरशद मदनी व मौलाना महमूद मदनी का बयान आ गया है। जिसके अनुसार हम इसका खुलकर विरोध करेंगे और लोगों के बीच जाएंगे। - जैनुर राशिद्दीन सिद्दीकी, नायब शहरकाजी