चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में तीन दिवसीय प्रादेशिक नाटक का समापन हुआ। यह आयोजन उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी और जिला प्रशासन के सहयोग से हुआ था। कानपुर की अनुभूति नाट्य इकाई ने हिंदी हास्य नाटक दिल की दुकान का मंचन किया।
कलाकारों ने नाटक में तीन परिवारों की कहानियों के माध्यम से समाज को शिक्षा दी। नाटक में एक दिल की दुकान खुलती है, जहां दिल खरीदे और बेचे जाते हैं। पहले परिवार में कंजूस पति को बादशाह का दिल लगवाया गया। वह धन लुटाने लगा जिससे उसकी पत्नी दुखी हो गई।
दूसरे परिवार में झगड़ालू पत्नी को लैला का दिल मिला। वह अत्यधिक प्यार लुटाने लगी जिससे पति को अपने कार्यालय तक नहीं जाने देती थी। तीसरे परिवार में शराबी पति को स्वामी महात्मा का दिल दिया गया। उसने तुरंत भगवा वस्त्र धारण कर लिए और पत्नी को स्पर्श से रोका, जिससे पत्नी भी परेशान हो गई। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के स्थानीय संयोजक भारत भूषण शर्मा ने नाटक के समापन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नाटक का मुख्य संदेश था कि जो कुछ भी हमें मिला है वही सबसे अच्छा है। दिल बदलवाने का विचार ही गलत था। इस नाटक को देखने के लिए बड़ी संख्या में समाजसेवी, कलाप्रेमी और आम लोग उपस्थित थे।