- कहीं तकनीकी खराबी तो कहीं लाइट की समस्या बताई
- 16 विद्यालयों में शुरू हुई डिजिटल पढ़ाई, बिजली कटौती और शिक्षकों की कमी बनी बाधा
संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में बच्चों को डिजिटल क्लास और एलईडी के माध्यम से शिक्षा एक सपना बनकर रह गया है। सरकार ने लाखों रुपये खर्च करके स्कूलों में डिजिटल क्लास बनवाई और एलईडी लगवाई, ताकि बच्चों को डिजिटल शिक्षा दी जा सके। लापरवाह सिस्टम के सामने सरकार की डिजिटल शिक्षा दम तोड़ रही है। कहीं पर डिजिटल क्लास तालों में कैद है तो कहीं पर तकनीकी खराबी को कारण बताया जा रहा है। कारण जो भी लेकिन यह स्पष्ट है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते बच्चों को उचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
स्कूलों में व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए जिले के खरखौदा ब्लॉक के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में पड़ताल की गई तो सच्चाई सामने आ गई। खंड शिक्षा अधिकारी भले ही सभी स्कूलों में एलईडी से शिक्षा देने की बात कर रहे हैं लेकिन धरातल पर स्थिति अलग ही देखने को मिली। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को डिजिटल माध्यम से बेहतर शिक्षा देने के उद्देश्य से शुरू की गई स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब की व्यवस्था खरखौदा ब्लॉक में पूरी तरह प्रभावी होती नजर आई। ब्लॉक के 16 विद्यालयों में डिजिटल क्लास बनाकर एलईडी लगाई गई। स्कूलों में अव्यवस्थाओं से सामने आया कि अधिकारी अपने कार्यालय में बैठकर ही स्कूलों की निगरानी कर रहे हैं।
केस-एक
गांव उलधन मढ़िया स्थित विद्यालय में करीब एक माह से स्मार्ट क्लास बंद है। प्रधानाध्यापक ऊधम सिंह ने बताया कि आए दिन मुख्यालय या बीआरसी पर ट्रेनिंग के लिए बुलाया जाता है, ऐसी स्थिति में कैसे एलईडी पर बच्चों को पढ़ाया जाए।
केस-दो
फखरपुर कबट्टा में करीब डेढ़ माह से सिस्टम में खराबी है। शिक्षक देवेंद्र सिंह ने बताया कि इस संबंध में जिले से लेकर लखनऊ तक शिकायत की गई, लेकिन अभी तक ठीक नहीं हुआ है। इसके कारण बच्चों को डिजिटल क्लास नहीं दी जा रही है।
केस-तीन
नालपुर स्थित कंपोजिट विद्यालय में लाखों खर्च करके बनाई गई आईसीटी लैब और एलईडी हैं। अलग-अलग निश्चित दिन में अलग-अलग कक्षा के बच्चों को एलईडी पर ज्ञान दिया जाता है। प्रधानाध्यापक संगीता ने दोपहर के समय कभी-कभी विद्युत आपूर्ति न मिलने को भी जिम्मेदार ठहराया है।
केस-चार
गांव उलधन स्थित प्राथमिक विद्यालय में ग्राम पंचायत के खजाने से एलईडी लगाई गई है। प्रधानाध्यापक मारूफ अली ने बताया कि जो शिक्षक एलईडी संचालित करते हैं, उन्हें बीआरसी पर ट्रेनिंग में लगाया गया है। नेटवर्क भी एक बड़ी समस्या है। अपने स्वयं के मोबाइल नेटवर्क से एलईडी चलाते हैं।
इंटरनेट की व्यवस्था और इन्वर्टर भी नहीं
शिक्षकों के अनुसार स्कूल टाइम में बिजली आपूर्ति बाधित रहती है। अधिकतर स्कूलों में इन्वर्टर की व्यवस्था नहीं है। एलईडी इंटरनेट से चलती है। इसके लिए अलग से न तो कोई बजट है और न ही इंटरनेट की व्यवस्था की गई है। स्मार्ट क्लास बंद होने का मुख्य कारण यह भी है कि शिक्षक चाहकर भी डिजिटल माध्यम से पढ़ाई जारी नहीं रख पाते।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
अधिकतर विद्यालयों में स्मार्ट क्लास संचालित हैं। जिन विद्यालयों में एलईडी बंद हैं, वहां पर या तो शिक्षक नहीं होंगे या फिर तकनीकी खराबी है। उनकी जांच कराकर एलईडी चालू कराई जाएंगी। - सत्येंद्र पाल सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी, खरखौदा
खरखौदा के गांव नालपुर स्थित कंपोजिट विद्यालय में एलईडी से शिक्षा ग्रहण करते बच्चे (संवाद)