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लावारिस पशुओं से फसलों को बचाना हुआ मुश्किल

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लावारिस पशुओं से फसलों को बचाना हुआ मुश्किल
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बहसूमा। लावारिस पशु किसानों के लिए काफी समय से मुसीबत का सबब बने हुए हैं। इन दिनों लावारिस गोवंश किसानों की लहलहाती फसल को बर्बाद कर रहे हैं। जिसके चलते कड़कड़ाती ठंड में भी किसानों को खेतों में टांड़ बनाकर रात में खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है।
रबी के सीजन में खेतों में गेहूं, आलू, मटर, सरसों की फसलें लहलहा रही हैं। इसके अलावा मवेशियों को चारा खिलाने के लिए किसानों ने खेतों में बरसीम की बुआई की हुई है। कस्बे व गांवों से सटे खेतों के मालिकों को इसका खामियाजा सबसे अधिक उठाना पड़ रहा है। कस्बों में लावारिस घूम रहे गोवंश नजदीक के खेतों में लहलहाती फसल को अपना निवाला बना रहे हैं।
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पालतू शूकर भी फसलों को उजाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। पहले आवारा शूकर, गधे व घोडे़ को कांजी हाउस में बंद कर छोड़ दिया करते थे, लेकिन सरकार ने अब कांजी हाउस समाप्त कर दिए हैं।
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किसान मायाराम, अजय तोमर, रविंद्र नागर व सुभाष का कहना है कि फसल बचाने के लिए कड़कड़ाती ठंड में खेतों में टांड़ बनाकर दिन-रात रखवाली कर रहे हैं। साथ ही खेतों में पुतला भी खड़ा करते हैं। किसानों का तर्क है कि रतजगा करने के बावजूद फसलें नहीं बच पा रही हैं। कुछ किसानों ने खेतों की तारबंदी भी की है। महमूदपुर सिखेड़ा निवासी बालेंद्र सिंह, अरुण कुमार आदि का कहना है कि फसल बचाना बहुत कठिन हो गया है।
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