- ट्रांसपोर्ट नगर स्थित पार्क में चल रही श्रीमद्भागवत कथा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। ट्रांसपोर्ट नगर स्थित पार्क में चल रही श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ के तीसरे दिन कथा व्यास जनार्दन तिवारी ने ध्रुव चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने जीवन में भगवान को महत्व देते हैं, वे प्रभु के प्रिय होते हैं। जो लोग व्रत नियम का पालन करते हैं, वह भगवान के सर्वाधिक प्रिय हो जाते हैं।
कथा व्यास जनार्दन तिवारी ने कहा कि ध्रुव का चरित्र अटूट भक्ति और आत्म समर्पण के महत्व को दर्शाता है। बचपन में सौतेली मां द्वारा अपमानित ध्रुव कड़ी तपस्या कर भगवान विष्णु को प्राप्त करते हैं। एक पैर पर खड़े होकर, निराहार रहकर, श्वास रोककर उन्होंने भगवान विष्णु की उपासना की। उनकी तपस्या से तीनों लोक कांप उठे। अंत में श्रीहरि प्रकट हुए और वर मांगने को कहा। ध्रुव ने कहा प्रभु मुझे ऐसी भक्ति दो कि मैं आपको कभी न भूलूं। भगवान ने उन्हें ध्रुव लोक प्रदान किया, जो आज भी आकाश में सात ऋषियों के मध्य चमकता है। ध्रुव लौटे तो पश्चाताप करती सुरुचि को क्षमा किया और महान राजा बने।
कथा में यह भी बताया कि प्रियव्रत स्वायम्भुव मनु के ज्येष्ठ पुत्र प्रियव्रत शुरू में विरक्त थे। नारद जी के उपदेश से वे संसार से विमुख हो गए थे। पिता मनु के अनुरोध और ब्रह्मा के आदेश से उन्होंने राज्य स्वीकार किया तथा बृहस्पति पुत्री बर्हिष्मती से विवाह किया। वे परम भक्त और योगी होते हुए भी उत्तम शासक बने। कथा में मुख्य यजमान जयभगवान मित्तल और सह यजमान प्रदीप गुप्ता, अशोक गुप्ता रहे। कथा में प्रमुख रूप से सेंसरपाल, पप्पू कंसल, शिवम शर्मा, देव, ओंकार दत्त शर्मा, प्रीति गर्ग, विभा तिवारी, मीना रहीं।