किसानों के लिए महत्वपूर्ण है तिथि
किसानों के लिए यह तिथि बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ज्योतिष विद्वान विनोद त्यागी ने बताया कि हलहारिणी अमावस्या यानि आषाढ़ी अमावस्या पर हल पूजन का विधान है। इस दिन उन सभी उपकरणों की पूजा की जाती है जिनका उपयोग खेती में किया जाता है। इस दिन किसान अच्छी फसल के लिए भगवान की पूजा करते हैं।
इस तिथि पर किसान विधि-विधान से हल पूजन करके ईश्वर से फसल हरी-भरी बनी रहने की कामना करते हैं। आचार्य कौशल ने बताया कि इसके साथ ही अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध करने के लिए भी शुभ दिन होता है। पितरों के तर्पण के लिए आषाढ़ अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान एवं दान-पुण्य किया जाता है।
शुरू हो जाएगी वर्षा ऋतु
भारत के मौसम विभाग के अनुसार आषाढ़ मास के अंत में वर्षा ऋतु प्रारंभ होती है। इसलिए किसान आषाढ़ अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या के रूप में मनाते हैं।
काली चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं
इस दिन काली चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से पाप-कर्मों का क्षय और पुण्य-कर्म उदय होते हैं। पितरों की प्रसन्नता और तृप्ति के लिए तर्पण दान और कालसर्प दोष निवारण के लिए सुबह स्नान के बाद चांदी से निर्मित नाग-नागिन की पूजा करें। सफेद पुष्प के साथ इसे बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।
इस दिन स्वच्छ वस्त्र पहनकर पितरों की प्रसन्नता के लिए हाथ में कुश की पवित्री लें और तिल जल से पितरों को तर्पण करें। इससे पितृ संतुष्ट होते हैं और पितृ दोष दूर होता है। साथ ही शिव रुद्राभिषेक, पितृदोष शांति पूजन और शनि उपाय करने से जीवन के सभी कष्ट समाप्त होते हैं।