पुलिस लाइन से सरकारी तेल लेकर प्राइवेट दुकान पर बेचने का मामला तूल पकड़ गया है। डीजीपी ने रिपोर्ट तलब की है। ऐसे में कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं मामले की जांच कर रहे नवागत आईपीएस ने शनिवार को एमटी विभाग का रिकॉर्ड खंगाला। आनन-फानन में रजिस्टर में खानापूर्ति करने का सिलसिला चल रहा है। जिस पर आईपीएस ने नाराजगी भी जताई है।
अमर उजाला ने स्टिंग ऑपरेशन कर पुलिस के ड्राइवरों द्वारा सरकारी तेल की कालाबाजारी का भंडाफोड़ किया था। इस मामले की डीजीपी जावीद अहमद ने मेरठ पुलिस से रिपोर्ट तलब कर ली। एसएसपी जे. रविंदर गौड़ ने शनिवार को मामले की जांच करने वाले नवागत आईपीएस अंकित मित्तल को बुलाकर विवेचना जल्द पूरी करने का कहा। इसके बाद आईपीएस अंकित ने आदर्श कक्ष में आरआई सत्यप्रकाश शर्मा को बुलाया और एक के बाद एमटी (मोटर ट्रांसपोर्ट) विभाग से सरकारी तेल का लेखा जोखा लिया। इस पर एमटी विभाग में तैनात पुलिसकर्मियों मेें हड़कंप मच गया। आनन फानन में गाड़ियों और उनमें खर्च होने वाले तेल खर्च की रिपोर्ट बनानी शुरू कर दी। देर शाम तक आईपीएस जांच पड़ताल में जुटे थे।
शहर की पुलिस फूंकती 60 हजार ली. तेल
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक प्रत्येक माह तीन टैंकर डीजल और दो टैंकर पेट्रोल पुलिस लाइन स्थित पेट्रोल पंप को मिलता है। प्रत्येक टैंकर में 12 हजार लीटर तेल होता है, यानी 60 हजार लीटर तेल आता है। यह तेल सिर्फ शहर की पुलिस के लिए है। जबकि देहात पुलिस की गाड़ियां निजी पेट्रोल पंप से तेल लेती हैं। जिसकी पर्ची पुलिस लाइन स्थित एमटी विभाग में जमा होती है। जबकि नियमानुसार मेरठ शहर की पुलिस को 24 हजार लीटर डीजल और 12 हजार लीटर पेट्रोल मिलना चाहिए।
ज्यादा मूवमेंट बताकर लेते तेल
बढ़ते अपराध का हवाला देकर इलाके में ज्यादा मूवमेंट होने की बात कहकर पुलिसकर्मी औसतन से अधिक तेल पुलिस लाइन से लेते हैं। गाड़ी ज्यादा चलने की रिडिंग का लेखा जोखा भी रजिस्टर में दर्ज होता है। उसके बावजूद पुलिस सरकारी तेल में काला बाजारी कर देती है। ज्यादा तेल कैसे मिल जाता है, इसका खुलासा तो पुलिस जांच में स्पष्ट होगा। फिलहाल तो एमटी विभाग के पुलिसकर्मियों की भी सरकारी तेल बेचने के मामले में संदिग्ध भूमिका है।
दो करोड़ रुपये मिलते हर महीने
एमटी विभाग के एचसीपी तेजसिंह शर्मा ने बताया कि सरकारी तेल व पुलिस की गाड़ियां का करीब दो करोड़ रुपये का हर माह प्रदेश सरकार बजट देती है। कितना तेल किसने फूंका और गाड़ी कितनी चली, इसका लेखा जोखा एमटी विभाग ही शासन को भेजता है। एमटी विभाग पुलिस लाइन स्थित पेट्रोल पंप के सामने बना हुआ है। इस विभाग के प्रभारी दरोगा सुभाष सिंह हैं। उनके साथ दो एचसीपी और एक पुलिसकर्मी लगे हैं। गाड़ी की मरम्मत की जिम्मेदारी भी एमटी विभाग की है।
किसी को बख्शा नहीं जाएगा
तेल चोरी के मामले को लेकर पुलिस महकमे में हड़कंप मचा है। दिनभर शहर में एक ही चर्चा है कि न जाने इस तेल की काला बाजारी के मामले में कितनी पुलिसकर्मियों पर गाज गिरेगी। पुलिसकर्मी खुद को बचाने का रास्ते तलाश रहे हैं। हालांकि पुलिस अफसरों ने स्पष्ट कहा है कि मामला डीजीपी तक पहुंच गया है। इसमें किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा।