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Meerut News: छह साल पुराने हनी ट्रेप मामले में डीजी आलोक सिंह के बयान दर्ज

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संवाद न्यूज एजेंसी
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मेरठ। चलते राहगीर को महिला के माध्यम से फंसाकर हनी ट्रेप कर अवैध वसूली करने के आरोप में मुकदमा दर्ज करने की अनुमति देने वाले तत्कालीन डीआईजी मेरठ व वर्तमान में डीजी आलोक सिंह ने अपने बयान वीसी के माध्यम से न्यायालय में दर्ज कराए। उन्होंने कहा कि घटना की एफआईआर दर्ज करने की अनुमति उनके द्वारा दी गई थी।
अभियोजन अधिकारी महेन्द्र प्रजापति ने बताया कि न्यायालय अपर जिला जज एंटी करप्शन कोर्ट सं0-2 सुधाकर दुबे को बताया कि घटना की बाबत जमरूदपुर नई दिल्ली के रहने वाले धर्मवीर के पुत्र धर्मेन्द्र वर्मा ने एसएसपी गौतमबुद्धनगर ग्रेटर नोएडा को 17 जून 2019 में प्रार्थना पत्र दिया था बताया था कि 08 मई 2019 को रात्रि लगभग साढ़े 9 बजे जब वह गोल्फ कोर्स रोड से दिल्ली की ओर जा रहा था, तभी रास्ते में एक महिला अनिता ने सैक्टर-44 के मोड़ यह कहते हुए लिफ्ट मांगी कि उसके पैर में चोट लगी है उसको चलने में दिक्कत हो रही है। जिस पर उसने लिफ्ट दे दी और छलौरा गांव की सब्जी मंडी पर रास्ते में छोड़ दिया।
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महिला को छोड़कर जैसे ही वह थोड़ा आगे चला तो सैक्टर-44 के मोड़ पर ही तेज गति से एक पुलिस जिप्सी आई और उसमें से पुलिस वालों ने उतरकर उसकी गाड़ी को रोका और उसकी गाड़ी लेकर थाना नोएडा की सैक्टर-44 की पुलिस चौकी पर लेकर चले गए। जहां पर चौकी इंचार्ज एसआई सुनील कुमार के सामने बिठा दिया। जहां पर उन लोगों ने आरोप लगाया कि उसने महिला के साथ छेड़छाड़ की है।
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अभियोजन अधिकारी महेन्द्र प्रजापति ने बताया कि समझौता के नाम पर लाखों रुपये की अलग-अलग किस्तों में वसूली किए जाने का आरोप लगा। तत्कालीन डीआईजी आलोक सिंह जो वर्तमान में डीजी पीएसी के पद पर लखनऊ में तैनात हैं, ने कार्रवाई किए जाने की अनुमति दी थी। उन्होंने बुधवार को वीसी पर अपने बयान दर्ज कराते हुए उपरोक्त घटना की एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दिए जाने की बात कही। न्यायालय ने अग्रिम सुनवाई के लिए 05 अगस्त की तिथि नियत की है।
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