मेरठ। देवोत्थापनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। देवोत्थान एकादशी 25 नवंबर को है। यह दिवाली के बाद बड़ा पर्व है। इस दिन को लेकर दो बड़ी मान्यता हैं। भगवान विष्णु चार महीनों के शयन के पश्चात जागकर शुभ कार्यों के पुन: आरंभ की आज्ञा देते हैं। दूसरी यह कि इस दिन तुलसी विवाह संपन्न किया जाता है।
देवोत्थान एकादशी पर तुलसी और विष्णु पूजन के साथ ही कामना की जाती है कि घर में मंगल कार्य निर्विघ्न संपन्न हों। तुलसी का पौधा चूंकि पर्यावरण तथा प्रकृति का भी द्योतक है। अत: इस दिन यह संदेश दिया जाता है कि औषधीय पौधे तुलसी की तरह सभी में हरियाली एवं स्वास्थ्य के प्रति सजगता का प्रसार हो। इस दिन तुलसी के पौधों का दान किया जाता है। आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि भारतीय पंचांग के अनुसार एकादशी का महत्व बहुत है। अत: इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन से विवाह के अतिरिक्त उपनयन, गृह प्रवेश आदि अनेक मंगल कार्यों को संपन्न करने की शुरूआत कर दी जाती है।
भगवान विष्णु-तुलसी का पर्व
देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम और तुलसी का विवाह हर घर में किया जाता है। इसमें सामान्य विवाह अनुष्ठानों की तरह हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करते हुए विवाह संपन्न होता है। शास्त्रों में बताया है कि जिन लोगों की कन्याएं नहीं होती वे तुलसी विवाह कर कन्यादान का पावन पुण्य प्राप्त करते हैं।