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ज्ञान और वैराग्य से बढ़कर है भक्ति : गोपाल कृष्ण

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- मवाना रोड स्थित डिफेंस कॉलोनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा
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संवाद न्यूज एजेंसी
गंगानगर। मवाना रोड स्थित डिफेंस कॉलोनी में मंगलवार को श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन भगवान के विराट स्वरूप सहित अन्य प्रसंग सुनाए गए। यजमान राधा मिश्रा और विशाल मिश्रा ने पूजा अर्चना की। कथा व्यास गोपाल कृष्ण ने बताया कि श्रीमद्भागवत वेदरूपी वृक्ष के पके फल की तरह है, जिसका मीठा होना निश्चित है। उन्होंने कहा कि ज्ञान और वैराग्य से बढ़कर भक्ति है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत के द्वितीय स्कंध में वर्णित चार श्लोकों में संपूर्ण भागवत का सार समाहित है। इसके माध्यम से भगवान ने ब्रह्मा को यह ज्ञान दिया कि सृष्टि से पहले, सृष्टि के समय और सृष्टि के बाद भी केवल वही परम सत्य हैं। जो कुछ भगवान से अलग दिखाई देता है, वह माया है। विराट स्वरूप में भगवान ने बताया कि संपूर्ण ब्रह्मांड ईश्वर के ही स्वरूप का विस्तार है। कथा में महर्षि नारद और ब्रह्माजी के बीच संवाद के माध्यम से बताया गया कि ज्ञान और वैराग्य से बढ़कर भक्ति है। उन्होंने भक्ति को तामस, राजस और सात्विक तीन रूपों में समझाया। इसमें सात्विक भक्ति को श्रेष्ठ बताया गया। ईश्वर को जानने का सर्वोत्तम मार्ग शुद्ध भक्ति है।
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कथा व्यास ने कहा कि सृष्टि भगवान की शक्ति से उत्पन्न होती है। कहा कि संपूर्ण ब्रह्मांड भगवान के शरीर के रूप में है, पर्वत उनकी अस्थियां हैं और नदियां नसें और सूर्य-चंद्र नेत्र हैं। कथा के दौरान भजनों की प्रस्तुतियों पर भक्त भावविभोर हो गए। कार्यक्रम संयोजक राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि बुधवार को दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक कथा होगी।
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