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विकास की बात: जुड़ने लगे सभी हाईवे, बचेगा समय, रफ्तार पकड़ेगा मेरठ शहर, लूप की तरह काम करेंगी सड़कें

Wed, 22 May 2024 10:55 AM IST
Dimple Sirohi विपुल सैनी, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ

सार

मेरठ के चारों ओर हाईवे का जाल तेजी से बिछाया जा रहा है। भविष्य में शहर की हर दिशा से कनेक्टिविटी और बेहतर होगी। बता दें कि मेरठ पांच नेशनल हाईवे से जुड़ा है, ऐसे में दूसरे जिलों के ट्रैफिक को शहर के बाहर से ही व्यवस्थित किया जा सकेगा।
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हाईवे निर्माण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ के चारों ओर हाईवे का जाल तेजी से बिछ रहा है। आने वाले समय में शहर की हर ओर कनेक्टिविटी मजबूत होगी और समय भी बचेगा। लूप की तरह ये सड़कें आउटर रिंग रोड का काम करेंगी। ऐसे में शहर के अंदर से होकर जाने की मजबूरी नहीं होगी। छह महीने में ही शहर की सूरत बदली नजर आएगी। व्यापार, शिक्षा और उद्योगों के लिए नए रास्ते खुलेंगे। 

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मेरठ पांच नेशनल हाईवे से जुड़ा है। एनएच-235, एनएच-58, एनएच-119, एनएच-709 ए तथा दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे को जोड़ा जा रहा है। इसमें खर्चा 992 करोड़ रुपये आंका गया है। गढ़मुक्तेश्वर से मेरठ आने वाले एनएच-709ए पर तेजी से काम चल रहा है। गढ़ रोड पर सिसौली के पास इंटरचेंज बनेगा।

यहां से मेरठ-हापुड़ एनएच-235 के लिए सड़क तैयार की जा रही है। आउटर रिंग रोड के तहत सिसौली से होते हुए हापुड़ रोड पर लोहियानगर के पास मौजूदा डंपिंग ग्राउंड के पास जाकर जुड़ेगा, जिसकी लंबाई करीब छह किलोमीटर है। यहीं से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के पांचवें चरण का काम तेजी से चल रहा है। आउटर रिंग रोड के आकार लेते ही हापुड़, बुलंदशहर, मुरादाबाद, बागपत जाने के लिए शहर के अंदर आने जरूरत नहीं होगी और समय भी तीस से चालीस फीसदी तक बचेगा।

नरहेड़ा के पास पांचवें फेज का दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का काम चल रहा है। लैंड फिलिंग के तौर पर मिट्टी बिछाई जा रही है। बड़े-बड़े डंफरों से मिट्टी डाल बुलडोजर के जरिए काफी दूर तक जमीन समतल की जा रही है। यहीं से सीधे दिल्ली आ-जा सकेंगे।

ऐसे ही गढ़ रोड को मवाना रोड से भी जोड़ा जा रहा है। सिसौली के पास से ही भावनपुर होते हुए सलारपुर तक 12.028 किमी. के करीब सड़क का निर्माण चल रहा है। इसकी लागत 992 करोड़ आंकी गई है, जिसे फरवरी 2025 तक पूरा किया जाने का लक्ष्य है। सलारपुर में भी इंटरचेंज प्रस्तावित है, जहां से दौराला के पास से होते हुए एनएच-58 पर सड़क मिलेगी। 

इनर रिंग रोड भी लेने लगी आकार
एमडीए वीसी अभिषेक पांडे ने बताया कि आउटर रिंग रोड पर जहां दूसरे जिलों से आने वाले यातायात को शहर से बाहर ही ले जाया जाएगा, वहीं इनर रिंग रोड भी शहर के जाम से निजात दिलाएगी। मवाना रोड को किला रोड से जोड़ने के लिए गंगानगर में 45 रोड का मेडा 17 करोड़ से निर्माण कर चुका है।

परतापुर गंगोल से चांदसारा, फफूंडा होते हुए 7.52 किमी. मार्ग का 40 करोड़ 45 लाख से चौड़ीकरण किया जा रहा है। इसके लिए शासन ने 14 करोड़ 15 लाख 90 हजार रुपये भी जारी कर दिए हैं। दिल्ली रोड पर पूठा से वेदव्यासपुरी होते हुए एनएच-58 को जोड़ने की तैयारी है, मेडा ने 30 करोड़ रुपये की डीपीआर इसके लिए तैयार की है।
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दिल्ली रोड व रुड़की रोड का जोनल प्लान अब लागू करने की तैयारी
रैपिड रेल कॉरिडोर पर शोरूम, दफ्तर व घर बनाए जा सकेंगे। एनसीआरटीसी की ओर से ली एंड एसोसिएट्स ने ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) नीति के लिए सर्वे पूरा हो चुका है। अब इसे उपाध्यक्ष के समक्ष प्रजेंटेशन के बाद लागू करने की तैयारी है। 

रैपिड कॉरिडोर के तहत परतापुर व मोदीपुरम में स्पेशल डेवलपमेंट एरिया (एसडीए) और सात ट्रांजिट ओरिएंटेड डवलपमेंट (टीओडी) जोन भी हैं। एसडीए और आईजेड का जोनल प्लान ली एंड एसोसिएट्टस तैयार कर रही है। इसके लिए ड्रोन से भी शहर का नक्शा बनाने का काम चल रहा है, जबकि डिमांड सर्वे पूरा कर लिया गया है।

मेडा उपाध्यक्ष अभिषेक पांडेय ने बताया कि महायोजना में रैपिड कॉरिडोर को मिश्रित भू-उपयोग में शामिल किया गया है। इसमें शोरूम, कॉमर्शियल काम्पलेक्स, होटल, रेस्टोरेंट तथा घर भी बनेंगे। कंपनी की ओर से हाल ही में रियल एस्टेट, इंडस्ट्री, ट्रेड एंड कॉमर्स के साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों के अग्रणी तथा सभी शहरवासियों से शहर को बेहतर बनाने के लिए सुझाव लिए गए थे। 

उपाध्यक्ष ने बताया कि टीओडी नीति के तहत आरआरटीएस कॉरिडोर पर 3200 हेक्टेयर में मिश्रित भू उपयोग रहेगा। इसके तहत कंपनी ने डिमांड को लेकर सर्वे पूरा कर लिया है।  
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