केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या में विवादित भूमि को छोड़कर बाकी अधिग्रहीत जमीन रामजन्मभूमि न्यास को लौटाई जाने वाली याचिका दायर करने को लेकर दारुल उलूम का कहना है कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है इसलिए इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता, जबकि देवबंदी उलमा ने इसका समर्थन करते हुए कहा कि जिस जमीन पर कोई विवाद ही नहीं वो जमीन जिसकी है उसको सौंप देनी चाहिए। जिससे वह अपनी जमीन का इस्तेमाल कर सकें।
अयोध्या में विवादित जमीन को छोड़कर बाकी अधिग्रहीत जमीन रामजन्भूमि न्याय को सौंपे जाने को लेकर केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने को लेकर दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कहा कि अयोध्या का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता। इसपर जो फैसला होगा वो सुप्रीम कोर्ट ही करेगा। वैसे भी अभी उन्हें याचिका दायर करने की जानकारी नहीं है।
मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की है हम उसका समर्थन करते हैं। बाबरी मस्जिद और राम मंदिर के अलावा जो दूसरी जमीनें हैं जिसके ऊपर न हिंदुओं और न मुसलमानों का कोई विवाद है। ऐसी जमीनों को जिसकी है उन्हें सौंप देना चाहिए। उन्होंने कहा है कि जिसका हक है वो उन्हें मिल जाए ताकि वह उसका इस्तेमाल कर सकें।